राजशाही बनाम आम जनता के रूप में देखा जा रहा है टिहरी का चुनाव
देहरादून ( आखरीआंख ) उत्तराखण्ड की पांचों लोकसभा सीटों पर राय के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस ने प्रचार प्रसार में दिन रात एक कर रखा है। दोनों की दलों के प्रत्याशियों व दिग्गज नेताओं को राय में अपने स्टार प्रचारकों के इंतजार को लेकर एक उत्सुकता दिखाई दे रही है। बात टिहरी संसदीय सीट की जाए तो चर्चाएं उठ रही है कि टिहरी की जनता लंबे समय से चली आ रही राजशाही परिवार की सरपरस्ती से कहीं न कहीं नाराज है? बताया जा रहा है कि लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि राजशाही परिवार से जुड़ा कोई भी व्यक्ति सिर्फ लोकसभा चुनाव के दौरान ही क्षेत्र में सक्रिय नजर आता है लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह व्यक्ति अगले चार साढ़े चार सालों के लिए गायब हो जाता है और क्षेत्र की जनता को उसके दर्शन एक बार फिर सिर्फ चुनाव के दौरान ही कर पाती है? राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो टिहरी संसदीय सीट पर इस बार का चुनाव राजशाही बनाम आम जनता के रूप में देखा जा रहा है? आम जनता की इस नाराजगी को विपक्षी प्रत्याशी एक मजबूत हथियार के रूप में इस्तेमाल करता हुआ दिखाई दे रहा है? टिहरी सीट से भाजपा प्रत्याशी माला राय लक्ष्मी शाह ने वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एक बड़ी जीत अंकित की थी लेकिन माना जा रहा है कि इस बार उनकी डगर कठिन है? उनके प्रतिद्वंदी के रूप में सामने कांग्रेस के प्रत्याशी प्रीतम सिंह है और उन्होंने अपने जनसंपर्क अभियान को टॉप गियर डाल रखा है। बहस छिड़ रही है कि अगर टिहरी लोकसभा चुनाव राजशाही बनाम आम जनता साबित हुआ तो ऐसा न हो कि भाजपा का 2014 के इतिहास को दोहराने का सपना सपना ही रह जाए?
लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक जनसभाओं के माध्यम से आवाम के दिलों में अपनी जगह बनाने की कोशिश करते नजर आ रहे है। उत्तराखण्ड में भी लोकसभा चुनाव का शोर अपने पूरे शबाब पर है। यहां की पांचों लोकसभा सीटों पर राय के प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस के बीच ही सीधी टक्कर देखी जा रही है। दोनों ही राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार में ऐढ़ी चोटी का जोर लगा रखा है क्योंकि सवाल साख का है। एक तरफ जहां भाजपा के सामने वर्ष 2014 की इतिहास को दौहराने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने राय में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का लक्ष्य है। इस चुनाव में भाजपा ने अपने तीन सिटिंग सांसद मैदान में उतारे है जबकि दो संसदीय सीटों पर नए चेहरे देखने को मिले है। बात करें टिहरी संसदीय सीट की तो इस बारे के लोकसभा चुनाव में यहंा की राजनीति के विचित्र् संकेत देखने को मिल रहे है? माना जा रहा है कि टिहरी सीट पर इस बार का चुनाव राजशाही बनाम आम जनता होगा? चर्चाएं उठ रही है कि टिहरी की जनता के मन में इस बात को लेकर काफी गुस्स नजर आ रहा है कि राजशाही परिवार से जब भी कोई व्यक्ति लोकसभा चुनाव लड़ता है तो वह मात्र उसी समय ही क्षेत्र में सक्रिय दिखाई देता है और तभी उसे क्षेत्र की समस्याएं भी दिखाई देती है और जिनका समाधान करने का आश्वासन देकर वह अपनी जीत की पटकथा लिखता है लेकिन जब वह चुनाव जीत जाता है तो उसके बाद वही क्षेत्र दिख जाए ऐसा इस बात की मात्र कल्पनी की जा सकती है? वर्ष 2014 में टिहरी सीट से भाजपा प्रत्याशी माला राय लक्ष्मी शाह ने जीत हासिल की थी। बता दें कि माला राय लक्ष्मी शाह टिहरी के राजशाही परिवार से ताल्लुक रखती है। वर्तमान समय में होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर कुछ अटपटे से समीकरण सामने आ रहे है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस बार का चुनाव राजशाही बनाम आम जनता के रूप में देखा जा रहा है और यह भी समझा जा रहा है कि क्षेत्र की जनता भाजपा प्रत्याशी की बेरूखी से खासी खफा है? बताया जा रहा है कि क्षेत्र की जनता की इस बेरूखी को कांग्रेस भूनाने का कोई मौका चूकना नहीं चाहती? यहीं कारण बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रीतम सिंह ने अपनी विधानसभा से जो संपर्क अभियान शुरू किया हुआ है उसे आगे बढ़ाते हुए वह जनता से रूबरू हो रहे है और भाजपा प्रत्याशी को कटघरे में खड़ा करते हुए केन्द्र व राय की डबल इंजन सरकार पर एक बाद एक तीखा प्रहार कर रहे है। जिस प्रकार से टिहरी सीट पर चुनाव को राजशाही बनाम आम जनता के रूप में देखने को मिल रहा है उससे इस बात का भी अंदाजा लग रहा है कि इस सीट पर इतिहास दौहराना भाजपा के लिए आसान न होगा?
