March 3, 2026

निशंक को मिल सकता है फायदा

बागेश्वर ( आखरीआंख )  उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट से एक बार फिर भाजपा के मौजूदा सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक पार्टी की ओर से प्रत्याशी हैं। उनके सामने भाजपा को इस सीट से छठी बार चुनाव जिताने की चुनौती है। निशंक का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व विधायक अबरीश कुमार और बसपा प्रत्याशी डॉ. अंतरिक्ष सैनी से है। इस सीट पर कांग्रेस चार बार और भाजपा पांच बार चुनाव जीत चुकी है।
राय के गठन के बाद इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस सिर्फ एक-एक बार ही चुनाव जीत पाए हैं। राय गठन के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में 2004 में इस सीट से सपा प्रत्याशी राजेंद्र कुमार बाड़ी चुनाव जीते। वहीं 2009 में हुए चुनाव में इस सीट का भूगोल बदल गया। देहरादून शहर की तीन विधानसभा सीटें इस लोकसभा का हिस्सा बनी। लगातार कई हार का सामना कर चुके कांग्रेस नेता हरीश रावत को भी हरिद्वार सीट पर ही जीत नसीब हुई। भाजपा के स्वामी यतिंद्रानंद को चुनाव हरा कर वे संसद पहुंच पाए।
2014 में इस सीट पर भाजपा से रमेश पोखरियाल निशंक तत्कालीन सीएम हरीश रावत की पत्नी रेणुका को बड़े अंतर से चुनाव हरा कर पहली बार सांसद बने। अब निशंक पर राय गठन के बाद दूसरी बार और कुल छठी बार भाजपा को जिताने का दारोमदार है। हरिद्वार लोकसभा ऐसी सीट है, जहां वोटरों में विशुद्ध पहाड़ से लेकर मैदानी वोटरों का मिश्रण है। धर्मपुर, डोईवाला, ऋषिकेश, हरिद्वार ग्रामीण सीट पर जहां बड़ी संया पर्वतीय वोटर हैं। तो कुछ सीटों पर पहाड़, मैदान का मिश्रण है। यादातर विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संया में मैदानी वोटर है। टिहरी बांध विस्थापित इसी सीट पर : टिहरी बांध के अधिकांश विस्थापित भी इसी सीट का हिस्सा हैं। धर्मपुर विधानसभा में देहराखास, कारगी, बंजारावाला, नई टिहरी कालोनी चाणक्यपुरी, भानियावाला, पशुलोक, श्यामपुर, रायवाला, पथरी, शिवालिकनगर क्षेत्र में बांध विस्थापित बसे हुए हैं। करीब 50 हजार से यादा बांध विस्थापित यहां वोटर हैं।
हरिद्वार लोकसभा सीट में कुल 14 विधानसभाएं हैं। इसमें तीन विधानसभा ऋषिकेश, डोईवाला व धर्मपुर देहरादून जिले का हिस्सा हैं। तो शेष 11 विधानसभाएं हरिद्वार जिले में हैं। कुल 14 विधानसभा सीटों में से 11 पर भाजपा के विधायक हैं। तीन विधानसभा भगवानपुर, पिरान-कलियर व मंगलौर पर कांग्रेस का कब्जा है।
हरिद्वार लोकसभा सीट पर राय के मुयमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की भी विधानसभा सीटें हैं। मुयमंत्री की डोईवाला व विधानसभा अध्यक्ष की ऋषिकेश विधानसभा भी इसी लोकसभा का हिस्सा है। साथ ही सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की हरिद्वार शहर सीट भी इसी लोकसभा सीट का हिस्सा है। ऐसे में इन सभी की भी प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी है। हरिद्वार लोकसभा सीट पहली बार 1977 में वजूद में आई। इससे पहले 24 साल तक हरिद्वार देहरादून लोकसभा का हिस्सा रहा। 1952 से 1976 तक यहां सभी लोकसभा चुनाव देहरादून सीट पर हुए। हरिद्वार सीट पर बसपा को छोड़ सभी दलों का खाता खुलता रहा है। 1977 में शुरुआत भारतीय लोकदल से हुई। इसके बाद इस सीट पर चार बार कांग्रेस और पांच बार भाज की जीत हुई। एक बार 2004 में इस सीट पर राजेंद्र कुमार बाड़ी सांसद का चुनाव जीत कर सपा का भी खाता खोल चुके हैं।