January 30, 2026

बिलकिस बानो के हौसले को सलाम

शीर्ष अदालत के हालिया फैसले से बिलकिस बानो तथा उसके परिवार के घावों पर कुछ तो मरहम लगेगा। अदालत ने गुजरात सरकार को आदेश दिए हैं कि वह बिलकिस बानो को 50 लाख रुपये की राहत राशि, सरकारी नौकरी व रिहायश भी मुहैया कराये। मार्च, 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान वह पांच माह से गर्भवती थी। तब उससे सामूहिक बलात्कार हुआ था। तब भीड़ ने उसके परिवार के सात व्यक्तियों की नृशंस हत्या कर दी थी, जिनमें उसकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी। बिलकिस बानो व उसका परिवार सलाम का हकदार है जिन्होंने केस को तर्कसंगत अंजाम तक पहुंचाया। विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को बिलकिस के बलात्कार के 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर उनके संबंधियों की हत्या के भी आरोप थे। इस अदालत ने सात आरोपियों, जिनमें 5 पुलिसकर्मी तथा दो डाक्टर थे, को रिहा कर दिया। नौ साल बाद बबई हाईकोर्ट ने धारा 218 (ड्यूटी में कोताही) तथा 201 (सबूतों से छेड़छाड़ करने) के आरोप में दोबारा गिरतार करके मुकदमा चलाया, जिसमें फैसला सुनाया गया। दोषी पाये गये तीन पुलिस अधिकारियों की पेंशन संबंधी सुविधाएं वापस ले ली गयीं तथा एक अफसर को दो रैंक नीचे पदावनत किया गया।
केस की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने कहा था कि ऐसे मामलों में सरकार 5 लाख रुपये की राहत राशि देती है। लेकिन बिलकिस बानो ने उक्त राशि को नामंजूर करते हुए शीर्ष अदालत से समाननीय राहत राशि की अपील की। उसने अदालत को बताया कि राय सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत राशि से उसका जीवनयापन संभव नहीं, अत: समानजनक राहत राशि दी जाये। अब चाहे यह धनराशि कितनी भी बड़ी हो, बिलकिस बानो पर हुए उन अत्याचारों के सामने कमतर है। फिर भी रोजगार तथा वित्तीय सहायता उसके परिवार को किसी हद तक संबल देगी। मंगलवार को अदालत के फैसले के कुछ घंटे बाद ही बिलकिस बानो अपने परिवार के साथ अपना वोट डालने गयी जो उसकी लोकतंत्र में आस्था को दर्शाता है। उमीद है कि गुजरात दंगों के अन्य दोषियों को भी कड़ी सजा मिलेगी ताकि दंगा पीडि़तों के जख्मों पर मरहम लग सके।

You may have missed