कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान को उमड़ा आस्था का सैलाब
ऋ षिकेष। कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली का पर्व ऋषिनगरी में धूमधाम के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगा भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। उन्होंने ब्राह्मणों और गरीबों को कंबल, अनाज और चांदी का दान भी किया। तड़के से ही गंगातट स्नानार्थियों से अटे रहे। शुभ नक्षत्र में पडऩे से कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व था। कार्तिक पूणिमा पर गंगा स्नान को गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। तड़के से ही ऋषिनगरी के त्रिवेणी घाट, 72सीढ़ी घाट, रामझूला घाट, गीता घाट, परमार्थ घाट, लक्ष्मणझूला घाट, पूर्णानंद घाट पर स्नानार्थियों की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की। योतिष डॉ. चंडीप्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा देवत्व को जगाने का पर्व है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दीपावली होती है। देव दीपावली हमें आसुरी वृत्तियों को त्यागकर देवत्व ग्रहण करने की प्रेरणा देती है। शुभ नक्षत्र में पडऩे के कारण तड़के से दोपहर तक स्नान का विशेष महत्व था। इस दिन स्नान से 12 पूर्णिमा के स्नान के बराबर फल मिलता है। श्रद्धालु गंगा तट पर दिये जलाकर पूजा करते है। घी के दीपक जलाने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु पूर्णिमा पर गरीब बचों को शिक्षण सामाग्री व ब्राह्मणों को धार्मिक पुस्तकें दान करते है। गंगा स्नान के बाद हवन-पूजन व दान भी किया जाता है। पर्व पर यज्ञोपवीत, मुंडन, नामकरण, दान के साथ अनुष्ठान किये जाते है। बताया कि महिलाएं देवोत्थान एकादशी से आरंभ पंच स्नान कार्तिक पूर्णिमा पर संपन्न करती है।
