March 4, 2026

सुभाष ने ली जिला पंचायत अध्यक्ष की शपथ 

हरिद्वार। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने सोमवार को शपथ ली। डीएम दीपेंद्र चौधरी ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुयमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता देकर बधाई दी और तुरंत देहरादून को निकल गए। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा का शपथ ग्रहण समारोह मात्र चार मिनट तक चला। सुभाष वर्मा आए हुए अतिथिगणों का धन्यवाद तक नहीं कर सके। उधर, समारोह में कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों का पूरा बहिष्कार दिखाई दिया। उल्लेखनीय है कि 47 सदस्यों वाले जिला पंचायत में छह सदस्यों के बूते पर भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता था। 45 सदस्यों द्वारा किए मतदान में सुभाष वर्मा को 25 मत मिले थे। समारोह में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, बीस सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष नरेश बंसल, विधायक देशराज कर्णवाल, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव चैंपियन, पूर्व विधायक सुरेश जैन, डॉ. नरेंद्र सिंह, रुड़की मेयर गौरव गोयल, जिलाध्यक्ष डॉ. जयपाल चौहान, मयंक गुप्ता, विनय रोहिला आदि शामिल थे।
किंगमेकर भी शपथ ग्रहण समारोह के पास ही दिखे – जिला पंचायत अध्यक्ष की ताजपोशी में किंगमेकर की भूमिका में रहे एक राजनीतिक दल के दो सदस्य भले ही शपथ ग्रहण समारोह में शामिल न हुए हों। लेकिन समारोह के दौरान वे जिला पंचायत कार्यालय में बैठे देखे गए। जबकि भाजपा के किंगमेकर को मंच पर स्थान दिया गया था। जिन्होंने भाजपा के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लाने के लिए राजनीतिक खेल खेला था। शपथ ग्रहण समारोह में दूसरी पार्टी के वही चेहरे जिला पंचायत कार्यालय परिसर में दिखे जिन्होंने भाजपा की जीत के लिए अपनी पार्टी को ही दगा दे दिया। हालांकि देखा जाए तो बसपा और कांग्रेस ने मतदान को लेकर किसी तरह का कोई व्हिप जारी नहीं किया था। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के बहिष्कार के बाद बसपा के कुछ सदस्य समारोह के इर्द गिर्द दिखे। एक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब बसपा ने अपना प्रत्याशी ही मैदान में नहीं उतारा और न ही व्हिप जारी किया तो ऐेसे में बसपा सदस्य अपने विवेक से वोट देने को स्वतंत्र थे। जिला पंचायत का कार्यकाल मात्र साल भर का रह गया है। ऐसे में वार्डों में विकास कार्य भी कराने हैं। भाजपा सत्ता में है इसलिए भाजपा प्रत्याशी को जिताया गया।
नहीं आए उपाध्यक्ष -जिला पंचायत उपाध्यक्ष राव आफाक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए। बोर्ड सर्वदलीय है और शपथ ग्रहण समारोह भाजपा का था। धन, बल, छल करके ही भाजपा ने चुनाव जीता है। वरना छह सदस्य वाली भाजपा चुनाव में विजयी नहीं होती।