विकास प्राधिकरणों से हो रही जनता की दिक्कतों को दूर करेंगे
गैरसैंण। जिला विकास प्राधिकरणों की वजह से जनता को हो रही दिक्कतों को सरकार दूर करेगी। विधानसभा समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद इस पर निर्णय किया जाएगा। इस विषय पर कांग्रेस के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच भारी हंगामे मे बाद संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने यह आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए ही है इस विषय में पूर्व में ही विस समिति गठित हो चुकने के बाद भी दोबारा चर्चा की अनुमति मिलने से एक बार को संवैधानिक संकट की स्थिति भी पैदा हो गई थी। बजट सत्र के तीसरे दिन जिला विकास प्राधिकरण के मुददे पर काफी हंगामा हुआ। दरअसल, पूर्व में विधानसभा इस मामले के उठने पर विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने समिति का गठन किया था। आज विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान सदन की अध्यक्षता कर रहे थे। कांग्रेस इस मुददे पर काम रोको प्रस्ताव लाई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष की तकरार के बीच उन्होंने इस विषय को नियम 58 में सुनने की इजाजत दे दी। इस मंजूरी पर सत्ता पक्ष के विरोध और विपक्ष की जिद के चलते दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। आज पहला मौका थाा जब अध्यक्ष को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के दबाव को झेलना पड़ां।
दोपहर 12:05 बजे विस अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन की कार्यवाही को दोबारा शुरु किया। पीठ की ओर से जिला प्राधिकरण विषय पर चर्चा की अनुमति को जारी रखते हुए उन्होंने बीच का रास्ता निकालते हुए विपक्ष से केवल दो लोगों का बोलने की अनुमति दी। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और विधायक दल के उपनेता करन माहरा ने कहा कि जिला प्राधिकरण भ्रष्टाचार के अडड़े बन चुके है। नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए। सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री कौशिक ने जिला विकास प्राधिकरण के गठन का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ते हुए कहा कि वर्ष 2016 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने 22 नए प्राधिकरण बनाने का निर्णय किया था। भाजपा ने जनता की समस्याओं को देखते इनकी संया घटाते हुए 13 किया। विस समिति की रिपोर्ट का अध्ययन कर सरकार जनहित में जो भी जरुरी होगा वो निर्णय करेगी। सरकार के जवाब के जवाब के बाद विस अध्यक्ष ने कांग्रेस ेके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस ने सदन से वॉक आउट कर दिया।
एक घंटे तक जबरदस्त हंगामा:- सुबह 11:05 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक पूरा वक्त सदन में जबदरस्त हंगामे की स्थित रही। जहां कांग्रेस जिला विकास प्राधिकरण को चर्चा के लिए मंजूर करने के लिए दबाव बनाती रही। वहीं सत्ता पक्ष के विधायक इसे स्वीकार न रकने की जिद पर। इस बीच दोनों के बीच तीखी तकरार होती रही। जब पीठ से चर्चा की मंजूरी मिल गई तो संसदीय कार्यमंत्री ने कड़ा प्रतिवाद किया। उनके विरेाध करने पर कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार विस अध्यक्ष पर दबाव बनाकर विनिश्च बदलवाना चाहती है। दोनों पक्षों को शांत न होते देख पहले सदन को 11:40 बजे स्थगित किया गया। इसके बाद 12 बजकर पांच मिनट पर दोबारा।
चर्चा की मंजूरी से संवैधानिक संकट:- जिला विकास प्राधिकरणों के विषय विस समिति की रिपोर्ट पेश होने 24 घंटे के भीतर दोबारा चर्चा की अनुमति से आज संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई थी। राय में पहली बार ऐसा हुआ है जबकि जिस विषय पर सदन में रिपोर्ट पेश कर दी गई हो, उस पर नियम-58 के तहत चर्चा की अनुमति मिल गई। दरअसल, नियमानुसार जिस विषय पर विस समिति रिपोर्ट दे देती है। उस पर दोबारा चर्चा नहीं होती। सदन की परंपरा यही है। समिति की रिपोर्ट पर सरकार एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार कर विस अध्यक्ष को सौंपती है। इस रिपोर्ट पर जरुर सदन के भीतर चर्चा हो सकती है। संसदीय जानकारों के अनुसार किसी विषय पर दोबारा चर्चा की अनुमति देने पर पूर्व में गठित समिति और उसकी रिपोर्ट को निरस्त करना जरुरी होता। ऐसे में विस अध्यक्ष के लिए भी धर्मसंकट की स्थिति पैदा हो जाती। कांग्रेस ने चतुराई से इस मामले को सरकार को घेरने में कामयाबी जरुर पाली।
जिला विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके हैं। लोगों ने ब्रोकर छोडे हुए है। 7228 घरेलू मानचित्रों में केवल 3822 ही पास हुए हैं। 2690 कामर्शिलय नक्शों में केवल 155 ही। आम जनता बेहद दुखी है। सरकार ठोस कदम उठाए। -इंदिरा हदयेश, नेता प्रतिपक्ष
विकास प्राधिकरण का गठन कांग्रेस सरकार ने ही किया था। बहरहाल कांग्रेस की गलतियों को भाजपा सरकार सुधार रही है। लोगों को
काफी कुछ राहत भी दी गई है। विस समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद निर्णय किया जाएगा। -मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री
