May 9, 2026

बागेश्वर में घर नहीं जा पा रहे बिहारी मजदूरों का सब्र का बांध टूटा

 

बागेश्वर। लंबे समय से घर जाने के लिए तहसील और कलक्ट्रेट का चक्कर लगाते-लगाते बिहारी मजदूरों का सब्र का बांध टूट गया। सैकड़ों की संया में निकलकर मजदूर पहले तहसील में गरजे, इसके बाद में कलक्ट्रेट में धमके। तहसील में उन्होंने बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने समय पर उन्हें वापस नहीं बुलाए जाने पर नाराजगी जताई। मालूम हो पूर्वी और पश्चमी चंपारण बिहार के करीब 1200 मजदूर लॉकडाउन के कारण जिले में फंसे हैं। वे अपने घरों को जाने के लिए बेताब हैं। उन्हें पहले बिहार सरकार ने हरी झंडी नहीं दी। अब झंडी मिली तो जाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। लंबे समय से कमरे में बैठे मजदूरों का सब्र का बांध सोमवार को टूट गया। करीब 350 की संया में मजदूर पहले तहसील में पहुंचे। यहां उन्होंने बिहार सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। मजदूरों ने कहा वे एक महीने से अपने घर जाने के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें भेजा नहीं जा रहा है। एक सप्ताह पहले उनसे आवेदन तक लिए गए हैं। जिले में उनके पास कोई काम नहीं है। बगैर काम के ही उन्हें कमरों का किराया और खाने की व्यवस्था करना भारी पड़ रहा है। एक सप्ताह पहले भी इस समस्या को लेकर वे जिलाधिकारी से मिले थे। तब उन्होंने बिहार सरकार से अनुमति नहीं मिलने की बात की थी और तीन दिन के भीतर भेजने का भरोसा दिया। एक सप्ताह बाद भी उन्हें नहीं भेजा जा रहा है। उन्होंने जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की। यहां रामधनी पटेल, विनय कुमार, चंदन पटेल राऊथ, सूरज कुमार, महेश कुमार सहित सैकड़ों की संया में मजदूर शामिल रहे।

बिहारी श्रमिकों को भेजने के लिए लगातार बिहार सरकार से संपर्क हो रहा है। अब अनुमति मिल गई है। इनके जाने के लिए ट्रेनों की बात चल रही है। ट्रेनों की हरी झंडी मिलते ही जिला मुयालय से इन्हें बसों में बैठाकर हल्द्वानी भेजा जाएगा। उमीद है दो दिन के भीतर समस्या का समाधान हो जाएगा।

– रंजना राजगुरु, डीएम, बागेश्वर।