सरकारी व्यवस्थाओं की खुली पोल, जांच के नाम पर सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग
देहरादून। राय में बढ़ते कारोना संक्रमण ने शासन-प्रशासन के दावों की कलई खोल दी है। राय में लौट रहे प्रवासियों की सैपलिंग, क्वारंटीन और उन्हें आइसोलेट करने की पुता व्यवस्था न होने के कारण अब कोरोना तेजी से पूरे राय में पैर पसार चुका है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भले ही प्रवासियों की स्वास्थ्य जांच व उन्हे क्वारंटीन करने के दावे कर रहे हों लेकिन उनके दावों में कितना दम है उसकी कलई उत्तरकाशी और टनकपुर में मिले कोरोना के मामलों ने खोल दी है। स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग भर की जा रही है। शरीर का तापमान नाप कर उन्हें उनके घर भेजा जा रहा है। क्योंकि सरकार के पास इन प्रवासियों को 14 दिन क्वारंटीन सेंटर में रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिन ग्राम प्रधानों को क्वांरटीन सेन्टर में प्रवासियों को रखने के आदेश दिये गये हैं। व प्रधान सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन प्रवासियों को वह अपने घर से कब तक खिला सकते है जब सरकार ने उन्हे कुछ दिया ही नहीं है। सरकार जिन प्रवासियों को होम क्वारंटीन कर रही है वह खुलेआम घूम रहे है और अपनी दुकानें व कारोबार चला रहे हैं। सरकार में बैठे लोगों के पास इन लोगों से यह अपील करने के अलावा कोई चारा नहीं है कि वह क्वारंटीन के नियमों का पालन करें। वहीं दून के जिलाधिकारी बताते है कि क्वारंटीन नियमों के उल्लघंन में अब तक डिजास्टर मेनेजमेंट एक्ट की धाराओं में 200 से अधिक केस दर्ज किये जा चुके है। शासन प्रशासन की लापरवाही अब आम जनता पर भारी पड़ रही है तथा पूरा राय कोरोना की चपेट में आता जा रहा है।
