पेयजल के राजकीयकरण पर कैबिनेट में हो फैसला
देहरादून । जल निगम जल संस्थान संयुक्त मोर्चा ने पेयजल के राजकीयकरण को लेकर दबाव तेज कर दिया है। मोर्चा पदाधिकारियों ने 11 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक में पेयजल के राजकीयकरण पर फैसला लेने पर जोर दिया। पेयजल का राजकीयकरण होने तक वेतन, पेंशन का भुगतान ट्रेजरी से किए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने को भी दबाव बनाया। संयुक्त मोर्चा के संयोजक रमेश बिंजौला और विजय खाली ने कहा कि सरकार ने पेयजल कर्मचारियों को वेतन, पेंशन का भुगतान ट्रेजरी से किए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए एक समिति का गठन किया गया है। समिति गठित किए जाने वाले पत्र में भी साफ किया गया है कि पेयजल के राजकीयकरण होने तक वेतन, पेंशन का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। जल संस्थान कर्मचारी संघ के महामंत्री श्याम सिंह नेगी ने कहा कि जब सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि वो पेयजल के राजकीयकरण को तैयार है। तो क्यों कैबिनेट से राजकीयकरण का आदेश नहीं किया जा रहा है। क्यों तत्काल राजकीयकरण पर सैद्धांतिक सहमति नहीं दी जा रही है। जल्द पेयजल के राजकीयकरण को सैद्धांतिक सहमति देने के साथ ही राजकीयकरण के आदेश करते हुए पेयजल सिस्टम को लेकर एक मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
अन्य राज्यों में भी पेयजल राजकीय विभाग
मीडिया प्रभारी संदीप मल्होत्रा ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में अन्य राज्यों में पेयजल राजकीय विभाग ही है। पेयजल सबसे महत्वपूर्ण विषय है। इसी को ध्यान में रखते हुए अन्य राज्यों ने पेयजल को राजकीय विभाग बनाया है। उत्तराखंड में पेयजल को राजकीय विभाग बनाए जाने की सबसे अधिक जरूरत है। यहां पेयजल से जुड़े विभाग बिखरे पड़े हैं। उन सभी को एक प्लेटफार्म पर लाते हुए पेयजल के राजकीयकरण पर सरकार तत्काल फैसला ले।
