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October 21, 2026

जंगलों में जान बूझकर आग लगाना अब नहीं आसान, वन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय


देहरादून ।  मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि जंगलों में जान बूझकर आग लगाने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाए। कहा कि जहां भी जंगलों में आग लगेगी, वहां संबंधित वन अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाए। मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार को सीएम आवास में प्रभागीय वनाधिकारियों के साथ जंगलों के आग की रोकथाम के संबंध में वर्चुअल बैठक की।  उन्होंने कहा कि फायर सीजन के दौरान गर्मियों के चार महीने वनाग्नि के मद्देनजर चुनौतीपूर्ण होते हैं लिहाजा इस अवधि में अधिक से अधिक सतर्क बरती जाए। अफसर ऐसी कोशिश करे कि वनाग्नि की घटनायें न के बराबर हों।  
सीएम धामी ने कहा कि जहां से भी वनाग्नि घटना की सूचना मिलती है, उस पर तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाए। अफसर रिस्पॉन्स टाइम को कम से कम करें। उन्होंने जंगलों के आग की रोकथाम के लिए प्रभारी वनाधिकारी के स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने और जल्द से जल्द हेल्पलाइन नंबर और टोल फ्री नंबर जारी करने के निर्देश दिए।  इन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों में जागरूकता लाई जाए। बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने वनाग्नि के लिहाज से अति संवेदनशील व संवेदनशील क्षेत्रों का ब्योरा भी रख।  बताया कि इन क्षेत्रों में आग की घटनाओं के रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इस दौरान प्रमुख वन संरक्षक अनूप मालिक, प्रमुख वन संरक्षक (पंचायत) डा.धनंजय मोहन, विशेष सचिव डा.मधुकर धकाते भी मौजूद रहे।
अफसर समन्वय बनाए:
मुख्यमंत्री ने जंगलों की आग के रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभागों के अफसरों को आपसी तालमेल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। कहा कि इस कार्य में स्थानीय लोगों, जन-प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों आदि का भी सहयोग लिया जाए। उन्होंने चीड़ के पिरुल का उपयोग किए जाने और आबादी क्षेत्रों में बंदरों के आवागमन को रोकने पर भी कार्ययोजना बनाने की हिदायत दी।

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