March 24, 2026

किसी भी दल के साथ पक्षपात नहीं करेगा


पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक क्लिप काफी चर्चा में थी। क्लिप में दिखाया गया कि तेलंगाना राज्य में एक गरीब सब्जी विक्रेता सडक़ के किनारे अपनी छोटी सी दुकान लगाए बैठी थी।
तभी एक रईसजादे ने उसके पीछे अपनी महंगी गाड़ी को कुछ इस तरह से पार्क कर दिया कि महिला की साड़ी का पल्लू गाड़ी के पिछले पहिये के नीचे दब गया। कुछ ही क्षण बाद जैसे ही महिला को इस बात का पता चला, तो वो गाड़ी मालिक से दुहाई करने लगी पर उसने एक न सुनी और एक भवन के अंदर चला गया। मजबूरी में उस महिला ने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस ने भी काफी प्रयास किया कि उसकी साड़ी का पल्लू किसी तरह से पहिये से मुक्त हो जाए। लेकिन पुलिस जो उपाय खोजा वह काफी सराहनीय है।
पुलिस ने एक मिस्त्री बुलाया और गाड़ी में जैक लगा कर महिला के पल्लू को मुक्त करवा दिया। परंतु तेलंगाना की पुलिस ने इस मनचले को सबक सिखाने की भी सोची। पुलिस वाले उस गाड़ी के पहिये को उतरवा कर अपने साथ पुलिस थाने ले जाने लगे। जैसे ही गाड़ी का पहिया उतारा जा रहा था तभी वो मनचला हड़बड़ाता हुआ बाहर आया। पुलिस के इस एक्शन पर घबराहट में उनके पैरों में गिरने लगा। माफी मांगने लगा। परंतु पुलिस ने उसकी एक न सुनी और पहिया उतार कर अपने साथ थाने ले गई।
इस बिगड़े मनचले के पास सिवाय अपना सर खुजाने के और कोई उपाय न था। शायद वो इस तरह से गाड़ी पार्क करने से पहले इंसानों की तरह सोचता तो ऐसा न होता। परंतु पैसे के घमंड में चूर इसे कुछ दिखाई नहीं दिया। यदि यहां पुलिस उस व्यक्ति से उलझती तो वो अवश्य अपने पैसे और रु तबे की धौंस दिखाता। गौरतलब है कि इस पूरे वीडियो को सोशल मीडिया पर ‘स्क्रिप्टेड वीडियो’ या नाटकीय वीडियो कहा जा रहा है। परंतु जो भी हो वीडियो डालने वाले ने जो संदेश देना चाहा वह देश के अन्य राज्यों की पुलिस के लिए एक अच्छा उदाहरण बना।

शिकायतों को जनहित में लेता है तो मतदाताओं के बीच भी सही संदेश जाएगा, कि चाहे ईवीएम पर गड़बडिय़ों के आरोप लगें या आचार संहिता के नियमों का उल्लंघन की शिकायत हो, आयोग किसी भी दल के साथ पक्षपात नहीं करेगा। जिस तरह पहले चरण के चुनावों में मतदान के प्रतिशत कम होने के बाद कुछ राजनैतिक दल घबराहट में गलतबयानी कर रहे हैं, चुनाव आयोग को इन सभी का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और नियम अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए। यदि चुनाव आयोग किसी भी राजनैतिक दल को उसके कद और आकार को नजरअंदाज कर नियम-कायदे के अनुसार उस पर कार्रवाई करेगा तो जनता के बीच चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। मतदाता को भी वोट करने पर गर्व होगा। यदि चुनाव आयोग ऐसा करता है, तो आने वाले शेष चरणों में हो सकता है कि मतदान का प्रतिशत बढ़ भी जाए।