सरोली हरज्यूँ ज्योनार में बजरंग बली दर्शन को उमड़ रहा जनसैलाब
बागेश्वर गरुड । विकास खण्ड के द्यौनाई घाटी के सरोली गाँव मे इन दिनों 13 वर्षों बाद हरज्यूँ ज्योनार का आयोजन चल रहा है।
आज पंचम दिवस के अवसर पर जागर गायक जिन्हें गुरु या दास भी कहा जाता हैं बिपिन आर्य ने देव डांगरो की स्तुति वंदना आरती के बाद पौराणिक गोल देवता की कहानी का बखान जागर शैली में कहते हुए कहा कि क्षत्रिय वंशीय राजा हालराई की जब चौथी अवस्था बीतने पर भी उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति नही हुई तो उन्होंने काफी सोचविचार कर एक और शादी करने का मन बनाया और उन्होंने कालिका से शादी रचाई।
भगवत्कृपा से कुछ ही समय उपरांत उनकी नई रानी गर्भवती हुई । जिसे देखकर उनकी पुरानी 7 रानियां काफी चिंतित हो गई । और उन सबने मिलकर नई रानी कालिका को मारने हेतू अनेक नई 2 तरकीबें आजमाई ।
लेकिन किसी तरह वह इन सबकी सौतले डाह को सहते हुए अपने गर्भावस्था के अंतिम दौर में पहुँची तो यहाँ पर भी उसकी सातों सौतनों द्वारा उसके पुत्र के जन्म के समय उसे पुत्र को गायब कर उसे पत्थरों के दर्शन कराए गए और उसे बता दिया गया कि उसके कोख से इनका जन्म हुआ है।
नवजात गोलू को उनके द्वारा मारने की अनेकों कोशिशें करने के बाद भी जब वे उसे मार पाने में असफल रही तो उन्होंने एक पिटारी में उसे बंदकर एक नदी में फेंक दिया जिसे एक मछुवारा अपने घर लाकर उसका लालनपालन करने लगा ।
अपनी उम्र के साथ बड़ा होने पर वह बालक राजा की रानियों को परेशान करने लगा । जिसकी शिकायत राजा तक पहुँच गई तो राजा ने उसे अपने दरबार मे बुलाया जिसपर बालक ने राजा को सभी बाते स्पष्ट बताई और उसकी राजगद्दी पर अपना हक भी जताया । इसी अवतारी बालक को कालांतर में कुमाऊं के न्याय देवता गोल्ज्यू के रूप में जाना जाता हैं। जिन्हें की हरज्यूँ की पूरी फ़ौज का भी हमेशा साथ मिला और संग में रहे पवनसुत हनुमान।
सरोली ज्योनार में क्षेत्र के सभी ग्रामों के भक्तगण देवदर्शन को पहुँच रहे है।
इस ज्योनार में 14 देव डांगर अवतरित हुए है। जो कि क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या बताई जा रही हैं। ग्राम प्रधान हरीश जीना ने बताया कि उनके गाँव मे 8 अवतरित होते है ।
ज्योनार में काफी बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ का कारण देव डांगर बजरंगबली के अवतरण को बताया जा रहा है। बहुत सारे भक्तगणों ने बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी मे आजतक इतना रौद्ररूप पवनपुत्र का ज्योनारो में कभी नही देखा है। यही कारण हैं कि दिनप्रतिदिन यहाँ बच्चे, युवक व वृद्ध महिला पुरूष भक्तजनो की भीड़ बढ़ती ही जा रही हैं। आज करीब 1 हजार के लगभग भक्तगण दर्शन को पहुँचे थे।
