December 15, 2025

उत्तर प्रदेश में 27,000 सरकारी स्कूल बंद करने की योजना पर आम आदमी पार्टी का कड़ा विरोध, शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल ?

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 27,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद करने की योजना को आम आदमी पार्टी ने शिक्षा के प्रति सरकार की नीतियों का शिकार बताया है। पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह कदम प्रदेश के गरीब, दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के बच्चों की शिक्षा के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि विगत कई वर्षों से उत्तर प्रदेश सरकार ने 26,000 स्कूल बंद कर दिए हैं और अब 27,000 और स्कूलों को बंद करने का प्रयास कर रही है।वंशराज दुबे ने कहा कि सरकार यह तर्क देती है कि जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से कम है, उन्हें बंद किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन स्कूलों में बच्चों की संख्या इतनी कम क्यों हो गई? उनका कहना है कि बंद हो रहे अधिकांश स्कूल दलित बस्तियों और पिछड़ी जातियों के गांवों में हैं, जहां भाजपा को चुनावों में हार मिली है। उन्होंने प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति का भी उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ कॉपियां, किताबें और शिक्षक तक मौजूद नहीं हैं। बलिया में एक सरकारी स्कूल में बिजली नहीं है, सहारनपुर के एक स्कूल में मिड-डे मील में कीड़े मिल रहे हैं, जबकि सोनभद्र के एक स्कूल में दूध में पानी मिलाकर बच्चों को पिलाया जा रहा है।वंशराज दुबे ने यह भी बताया कि सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुसार 6 साल से कम उम्र के बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में दाखिला नहीं दिया जाता, जिससे बच्चों के स्कूल ड्रॉप आउट होने का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा स्कूलों में दाखिले के लिए प्रधानाध्यापकों को जटिल कागजी कार्यवाही से गुजरना पड़ता है, जो बाधा बन रही है।उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजनौर में स्कूलों के विलय के नाम पर बच्चों को अच्छी स्थिति वाले स्कूल से हटाकर टीन शेड जैसे असुविधाजनक स्थानों पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह नीति न केवल शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि गरीब व पिछड़ा वर्ग के बच्चों को शिक्षा से दूर करने का प्रयास है।आप प्रदेश महासचिव दिनेश सिंह पटेल ने कहा कि आम आदमी पार्टी शुरू से ही स्कूलों के बंद होने के खिलाफ आवाज उठाती रही है। उनका कहना था कि योगी सरकार गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करना चाहती है, जबकि आम आदमी पार्टी का फोकस स्कूलों को मजबूत बनाने पर है। उन्होंने दिल्ली की सफलता का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की सरकार ने प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में नामांकन दिलवाया है।अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल ने भी भाजपा पर आरोप लगाया कि वह स्कूलों को बंद कर दलित, पिछड़ा और आदिवासी समाज को शिक्षा से दूर रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी स्कूल में बच्चे कम हैं, तो सरकार उसकी गुणवत्ता क्यों नहीं सुधारती, बल्कि उसे बंद क्यों करती है। विनय पटेल ने यह भी कहा कि बेरोजगारी को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है और शिक्षामित्रों, आंगनवाड़ी व अन्य कर्मचारियों के भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दो लाख शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन सरकार ने अपने शासनकाल में 60,000 स्कूल बंद कर करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी छीन ली है।आम आदमी पार्टी आगामी 9 जुलाई से प्रदेश में ‘स्कूल बचाओ अभियानÓ शुरू करेगी, जिससे शिक्षा को बचाने और कमजोर वर्ग के बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। पार्टी ने न्यायालय से भी इस योजना पर रोक लगाने की गुहार लगाई है ताकि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित किया जा सके।इस पूरे मामले में शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और सरकारी नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश के बच्चों के भविष्य को गंभीर खतरा बताया जा रहा है, जिसका प्रभाव सीधे समाज के कमजोर तबकों पर पड़ रहा है।