January 29, 2026

बागेश्वर में साइबर ठगों पर पुलिस की बड़ी जीत, 5 घंटे की ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ तोड़ी, ₹2 लाख बचाए


बागेश्वर। साइबर अपराधियों की नई और खतरनाक चाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ को बागेश्वर पुलिस ने समय रहते नाकाम कर एक बड़ी मिसाल कायम की है। पुलिस अधीक्षक श्री चन्द्रशेखर घोडके के निर्देशन में चल रहे त्वरित रिस्पांस अभियान के तहत थाना कपकोट पुलिस ने एक ग्रामीण को मानसिक बंधक बनाए जाने से मुक्त कराते हुए उसकी जीवनभर की कमाई लुटने से बचा ली।
02 जनवरी 2026 को ग्राम ऐठान (कपकोट) निवासी कल्याण राम को एक अज्ञात कॉल आई, जिसमें ठगों ने खुद को जम्मू-कश्मीर एटीएस का अधिकारी बताकर पुलवामा हमले से जोड़ दिया। गिरफ्तारी और देशद्रोह का भय दिखाकर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को एक कमरे में बंद कर दिया और करीब 5 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान उससे बैंक खाते और आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी भी हासिल कर ली गई।
स्थिति तब उजागर हुई जब कल्याण राम ने घंटों दरवाजा नहीं खोला। पड़ोसियों को शक हुआ और उन्होंने तत्काल थाना कपकोट पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को समझते हुए थानाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह नगरकोटी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और सूझबूझ से कमरे का दरवाजा खुलवाकर पीड़ित को साइबर ठगों के चंगुल से आज़ाद कराया।
पुलिस जब मौके पर पहुंची, उसी समय ठग पीड़ित के दो बैंक खातों से करीब ₹02 लाख की रकम ट्रांसफर करने वाले थे, जिसे पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर रुकवा दिया। समय पर कार्रवाई न होती तो चंद मिनटों में पीड़ित की पूरी जमा-पूंजी साफ हो सकती थी। पुलिस ने न सिर्फ पैसे बचाए बल्कि पीड़ित की काउंसलिंग कर उसे मानसिक रूप से भी संभाला।
घटना के बाद बागेश्वर पुलिस ने साफ शब्दों में जनता को चेताया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही फोन पर पैसे मांगती है। साइबर ठगी की किसी भी आशंका में घबराने के बजाय तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। सतर्कता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है—और बागेश्वर पुलिस ने यह बात एक बार फिर साबित कर दी है।