गरुड़ की धरती से उठा शौर्य का शिखर, हवलदार जगदीश दुबे को सेना मेडल से नवाज़ा गया
गरुड़, बागेश्वर। देवभूमि उत्तराखंड की वीर परंपरा को एक बार फिर गौरवान्वित करते हुए गरुड़ विकासखंड के सिल्ली गाँव निवासी हवलदार जगदीश दुबे ने अपने अदम्य साहस, असाधारण पराक्रम और सैन्य कौशल से न केवल अपने क्षेत्र, बल्कि पूरे प्रदेश का मान ऊँचा किया है। पहली बटालियन पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्स) में सेवारत हवलदार जगदीश दुबे को उनकी अतुलनीय वीरता के लिए प्रतिष्ठित सेना मेडल से सम्मानित किया गया है, जो भारतीय सेना में शौर्य और बलिदान का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 जून 2024 को जम्मू-कश्मीर में चलाए जा रहे एक अत्यंत संवेदनशील सर्च ऑपरेशन के दौरान हवलदार जगदीश दुबे ने असाधारण सूझबूझ और निर्भीकता का परिचय देते हुए एक आतंकवादी को नजदीक से सटीक निशाना बनाकर मार गिराया। इस साहसिक कार्रवाई ने न केवल ऑपरेशन को निर्णायक सफलता दिलाई, बल्कि सुरक्षा बलों को संभावित बड़े खतरे से भी बचाया। उनकी यह वीरता भारतीय सेना के सर्वोच्च पेशेवर मानकों और बलिदानी भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।
इस अद्वितीय शौर्य के लिए सेना दिवस के पावन अवसर पर जयपुर स्थित दक्षिण पश्चिमी कमांड में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी द्वारा हवलदार जगदीश दुबे को सेना मेडल प्रदान किया गया। यह क्षण न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन का गौरवपूर्ण अध्याय बना, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय रहा।
हवलदार जगदीश दुबे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके पिता नरोत्तम दुबे, माता गंगा देवी दुबे, पत्नी पूजा दुबे, बड़े भाई राजेश दुबे सहित समस्त परिवार में हर्ष और गौरव का वातावरण है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, सेवानिवृत्त सैन्य व शैक्षिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा ग्रामीणों ने एक स्वर में उन्हें बधाई देते हुए कहा कि जगदीश दुबे ने अपनी वीरता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनने का कार्य किया है।
निस्संदेह, हवलदार जगदीश दुबे की यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि गरुड़ की धरती आज भी ऐसे सपूतों को जन्म दे रही है, जिनकी नसों में राष्ट्रभक्ति बहती है और जिनका साहस देश की सीमाओं की अटूट रक्षा का संकल्प लिए हुए है।
