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November 8, 2026

अंकिता भंडारी न्याय की पुकार: बागेश्वर में संघर्ष वाहिनी का सशक्त नुक्कड़ नाटक, सरकार और व्यवस्था पर तीखे सवाल


बागेश्वर। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय की माँग एक बार फिर सड़कों पर मुखर होती दिखाई दी, जब संघर्ष वाहिनी बागेश्वर के कार्यकर्ताओं ने नगर के विभिन्न प्रमुख स्थलों—एसबीआई तिराहा, पंत चौक, बागनाथ जी गेट तथा ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान—में प्रभावशाली नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया। इन नाटकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने हत्याकांड में संलिप्त बताए जा रहे वीवीआईपी और वीआईपी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा पूरे मामले की सीबीआई जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराए जाने की पुरज़ोर माँग उठाई।
नुक्कड़ नाटक के सजीव और संवेदनशील प्रस्तुतीकरण के ज़रिये संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए। उनका कहना था कि यदि जाँच वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी होनी है, तो उसे प्रभाव और दबाव से मुक्त रखते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही कराया जाना चाहिए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की कानून व्यवस्था कमजोर होती जा रही है और प्रभावशाली लोगों को बचाने के प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं, जो न्याय की अवधारणा को ही चुनौती देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान संघर्ष वाहिनी के नेताओं ने राज्य में पनप रही तथाकथित ‘रिज़ॉर्ट संस्कृति’ और उससे जुड़ी अय्याशी पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए घातक बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों को किसी भी कीमत पर बढ़ने नहीं दिया जाएगा, क्योंकि इसका सीधा असर समाज की नैतिक और सांस्कृतिक संरचना पर पड़ रहा है।
इस अवसर पर भाकपा (माले) के केंद्रीय महासचिव इंद्रेश मैखुरी और संघर्ष वाहिनी बागेश्वर के जिलाध्यक्ष कवि जोशी ने भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य में अराजकता का माहौल व्याप्त है और सरकार जनहित के मुद्दों को गंभीरता से लेने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता को नियंत्रित नहीं करती, बल्कि जनता ही सरकार को जवाबदेह बनाती है।
इंद्रेश मैखुरी ने स्पष्ट किया कि जब तक अंकिता भंडारी प्रकरण में पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आम जनता से भी इस आंदोलन से जुड़ने और न्याय की इस लड़ाई को सामूहिक स्वर देने की अपील की गई, ताकि अन्याय के विरुद्ध समाज की एकजुट आवाज़ सत्ता के गलियारों तक गूंज सके।

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