इस दिग्गज पत्रकार का दिल्ली में निधन, दशकों तक बीबीसी के जरिए दुनिया को बताया हिंदुस्तान का हाल
नई दिल्ली । दक्षिण एशियाई पत्रकारिता के पुरोधा और भारत की ‘बुलंद आवाजÓ माने जाने वाले दिग्गज पत्रकार मार्क टली का नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके जाने से पत्रकारिता जगत के एक सुनहरे और बेहद प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया है। मार्क टली केवल एक पत्रकार या लेखक नहीं थे, बल्कि दशकों तक वे भारतीय उपमहाद्वीप में घटित होने वाली हर बड़ी घटना की सबसे विश्वसनीय आवाज बने रहे। एक लंबे अरसे तक उनकी आवाज रेडियो और टीवी के जरिए करोड़ों घरों तक पहुंची और लोगों के दिलों में बसी रही।
पीढ़ियों ने सुनी उनकी रिपोर्टिंग, बीबीसी का थे पर्याय
भारत, पाकिस्तान और पूरे दक्षिण एशिया में मार्क टली का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं था। बीबीसी के साथ उनका नाम इस कदर जुड़ा था कि लोग बीबीसी का मतलब मार्क टली ही समझते थे। उन्होंने दशकों तक इस उपमहाद्वीप की नब्ज को टटोला और उसे दुनिया के सामने रखा। भारत में बीबीसी के ब्यूरो चीफ और संवाददाता के तौर पर उन्होंने इस क्षेत्र के इतिहास के सबसे नाजुक, हिंसक और अहम पलों की लाइव रिपोर्टिंग की। उनकी खबरों में गहराई, संदर्भ और आम आदमी के जीवन के प्रति जो सम्मान दिखता था, उसी ने उन्हें दर्शकों और श्रोताओं के बीच बेजोड़ विश्वसनीयता और भरोसा दिलाया था।
भारत की आत्मा को समझने वाले लेखक
ब्रॉडकास्टिंग और हार्ड-कोर जर्नलिज्म से इतर, मार्क टली एक बेहद संवेदनशील और उम्दा लेखक भी थे। उनकी किताबों में भारत के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के साथ उनका गहरा लगाव साफ झलकता था। वे एक ऐसे विदेशी थे, जिन्होंने भारत को न केवल देखा, बल्कि उसे जिया। उनकी लेखनी ने भारत की जटिलताओं और इसकी खूबसूरती, दोनों को बखूबी बयां किया। उनका भारत प्रेम जगजाहिर था और यही वजह थी कि उन्होंने अपना पूरा जीवन यहीं बिताने का फैसला किया था।
दुनियाभर में शोक की लहर
उनके निधन की खबर से दुनियाभर के मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वरिष्ठ पत्रकारों, विद्वानों, राजनेताओं और जानी-मानी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। हर कोई मीडिया और सार्वजनिक संवाद में उनके अतुलनीय योगदान को याद कर रहा है। मार्क टली का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि उस दौर का अंत है जब रेडियो पर उनकी भारी और गंभीर आवाज सुनकर लोग खबरों की सत्यता पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया करते थे।
