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November 5, 2026

‘श्रमिक नेता के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई निरस्त हो


रुद्रपुर । श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई गुंडा एक्ट की कार्रवाई और उन्हें जिला बदर किए जाने की चेतावनी के विरोध में मंगलवार को विभिन्न ट्रेड यूनियनों, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने कुमाऊं कमिश्नर और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) कुमाऊं क्षेत्र को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कार्रवाई निरस्त करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जिन चार मुकदमों के आधार पर दलजीत सिंह को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी किया गया है, उनमें से एक मामले में उन्हें पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है, जबकि दूसरे मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रभावी है।इसके बावजूद इन मामलों को रिपोर्ट में शामिल कर कार्रवाई शुरू की गई। शेष दो मामलों में भी जिला एवं सत्र न्यायालय, रुद्रपुर से उन्हें जमानत मिल चुकी है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में दलजीत सिंह को क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बताया गया है, जबकि नोटिस 11 मई को जारी होने के बावजूद लगभग एक माह बाद जून में उपलब्ध कराया गया। इससे प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। ज्ञापन में कहा गया कि एसएसपी की संस्तुति पर दलजीत सिंह को ऊधमसिंह नगर से निष्कासित करने की चेतावनी दी गई है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि पंतनगर स्थित इंटरार्क कंपनी में वर्षों से कार्यरत दलजीत सिंह को जिला बदर करना उनके और उनके परिवार के रोजगार व सम्मानजनक जीवन के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। संगठनों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष जुलाई में इंटरार्क कंपनी में वेतन समझौता होता है और उससे ठीक पहले जून में गुंडा एक्ट का नोटिस जारी किया गया, जिससे यह आशंका पैदा होती है कि वेतन समझौते से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। ज्ञापन में दलजीत सिंह को मजदूरों और आम जनता के बीच लोकप्रिय एवं सम्मानित व्यक्ति बताते हुए कहा गया कि वे लंबे समय से श्रमिक हितों और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। ऐसे व्यक्ति को गुंडा घोषित कर नोटिस जारी करना निंदनीय है। प्रतिनिधिमंडल ने कुमाऊं कमिश्नर से हस्तक्षेप कर कार्रवाई निरस्त कराने की मांग की। वहीं, श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी और कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई पर रोक नहीं लगी तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तराखंड में विस्तारित किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में दिनेश तिवारी, राजीव लोचन शाह, प्रभात ध्यानी, दिनेश चंद्र, कैलाश चंद्र जोशी, गिरीश आर्या, दलजीत सिंह, हरेन्द्र सिंह, मुकुल, कैलाश भट्ट और मनमोहन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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