गरुड तहसील दिवस में 25 शिकायतें दर्ज,स्वास्थ्य से लेकर बिजली-पानी तक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
गरुड़, बागेश्वर। तहसील गरुड़ में आज तहसीलदार निशा रानी की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस में जनता की पीड़ा स्पष्ट तौर पर झलकती हुई नजर आई।
इस दौरान कुल 25 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें अधिकांश शिकायतें पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी रहीं। खासतौर पर बिजली विभाग की लगातार लापरवाही को लेकर फरियादियों ने तीखी नाराजगी जाहिर की और नियमित आपूर्ति व त्वरित समाधान की मांग उठाई।
तहसील दिवस के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। उत्तराखण्ड क्रांति दल के ब्लॉक अध्यक्ष एडवोकेट ग्रीश कोरंगा ने अपने ज्ञापन में तहसील गरुड़ क्षेत्रांतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व उपकेंद्रों में फार्मासिस्टों की गंभीर कमी को जनहित के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि लंबे समय से कई स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति न होने अथवा राजनीतिक पहुंच के कारण उन्हें अन्यत्र अटैच किए जाने से आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन के अनुसार, फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति के कारण आकस्मिक प्रसव, दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है, जिससे समय पर उपचार न मिलने के कारण जनहानि तक की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति न केवल सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली जनता के साथ घोर अन्याय को भी उजागर करती है।
एडवोकेट कोरंगा ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की कि तहसील गरुड़ क्षेत्र के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उपकेंद्रों में तत्काल प्रभाव से फार्मासिस्टों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए व सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एम्बुलेंस सेवा तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि जब इस बाबत तहसीलदार निशा रानी ने स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि से एम्बुलेंस बाबत जानकारी देने को कहा गया तो वह कोई भी ठोस जबाब देने में असमर्थ रहा। जिसपर तहसीलदार ने उसे आज ही एम्बुलेंस बाबत ठोस व सम्पूर्ण जानकारी देने को कहा गया।
कोरंगा ने कहा कि इनके बिना स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु नही हो पा रही हैं। और जनता को न्यूनतम उपचार के लिए भटकना पड़ रहा हैं।। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होना पड़ेगा।
कुल मिलाकर तहसील दिवस में उठे मुद्दों ने यह साफ कर दिया कि गरुड़ क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनता का धैर्य जवाब देने लगा है। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन शिकायतों को औपचारिकता तक सीमित रखता है या वास्तव में धरातल पर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाता हैं।
