दुग्ध क्रांति की नई आहट: बागेश्वर में उत्पादन, भुगतान और पारदर्शिता की दिशा में निर्णायक पहल
बागेश्वर । जनपद में दुग्ध उत्पादन और विपणन तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे द्वारा दुग्ध अवशीतन केंद्र कमेड़ी, दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति क्षेत्रपाल तथा विकास भवन स्थित आंचल आउटलेट का किया गया निरीक्षण न केवल प्रशासनिक सक्रियता का संकेत है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता का भी स्पष्ट प्रमाण है। निरीक्षण के दौरान संचालन व्यवस्था, स्वच्छता, भुगतान प्रणाली और आय संवर्धन की संभावनाओं का गहन परीक्षण किया गया, जिससे यह संदेश गया कि दुग्ध क्षेत्र को अब नई संरचनात्मक मजबूती प्रदान की जाएगी।
दुग्ध अवशीतन केंद्र कमेड़ी में व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने दो पीआरडी जवानों की तैनाती के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। चारा नर्सरी के विकास को बढ़ावा देने, कृषकों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने तथा पात्र सदस्यों को REAP योजना के अंतर्गत ‘अल्ट्रा पुअर पैकेज’ से लाभान्वित करने के निर्देश यह दर्शाते हैं कि प्रशासन दुग्ध उत्पादन को केवल संग्रहण तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे समग्र आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाना चाहता है।
क्षेत्रपाल स्थित दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति में महिला दुग्ध उत्पादकों से सीधे संवाद कर जिलाधिकारी ने उनकी आय और भुगतान संबंधी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने सभी उत्पादकों को रियल टाइम भुगतान सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। यह निर्णय विशेष रूप से महिला उत्पादकों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है, क्योंकि समयबद्ध भुगतान ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिरता को सीधे प्रभावित करता है।
विकास भवन स्थित आंचल आउटलेट के निरीक्षण के दौरान संचालन में नियमितता और पारदर्शिता पर विशेष बल दिया गया। प्रतिदिन सुबह और शाम चार-चार घंटे संचालन, सभी रजिस्टरों का अद्यतन रख-रखाव तथा आय-व्यय का सुव्यवस्थित लेखा-जोखा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अगले माह तक 50 हजार रुपये की आय का लक्ष्य निर्धारित कर कार्ययोजना बनाने का निर्देश प्रशासन की परिणामोन्मुखी कार्यशैली को रेखांकित करता है। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी भी उपस्थित रहे।
सहायक निदेशक डेयरी अनुराग मिश्रा के अनुसार, कमेड़ी अवशीतन केंद्र में 85 समितियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2200 लीटर दुग्ध का संग्रहण किया जा रहा है, जबकि क्षेत्रपाल समिति प्रतिदिन लगभग 240 लीटर दूध एकत्र कर रही है। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि यदि गुणवत्ता, पारदर्शिता और भुगतान व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए, तो दुग्ध उत्पादन जनपद की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुग्ध की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है। गुणवत्ता परीक्षण, स्वच्छता मानकों और वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा। साथ ही युवाओं और महिलाओं को डेयरी गतिविधियों से जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने पर बल दिया गया। निस्संदेह, यह पहल बागेश्वर में दुग्ध क्षेत्र को नई गति देने के साथ-साथ ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक सशक्त आधारशिला सिद्ध हो सकती है।
