March 14, 2026

कत्यूर घाटी में फिर गूंजेगी संस्कृति की स्वर लहरियां, 3 से 6 अप्रैल तक होगा भव्य कत्यूर महोत्सव

कत्यूर घाटी में फिर गूंजेगी संस्कृति की स्वर लहरियां, 3 से 6 अप्रैल तक होगा भव्य कत्यूर महोत्सव
गरुड़, बागेश्वर। कुमाऊँ की ऐतिहासिक कत्यूर घाटी एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का विराट उत्सव मनाने की तैयारी में है। गरुड़ स्थित ब्लॉक सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बहुप्रतीक्षित कत्यूर महोत्सव आगामी 3 अप्रैल से 6 अप्रैल तक भव्य और आकर्षक रूप में आयोजित किया जाएगा। बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने महोत्सव को यादगार और ऐतिहासिक बनाने के लिए विस्तृत मंथन किया।
बैठक में महोत्सव के दौरान प्रस्तुत की जाने वाली स्थानीय पारंपरिक सांस्कृतिक झांकियों को विशेष महत्व देने पर जोर दिया गया, ताकि कत्यूर घाटी की गौरवशाली लोकसंस्कृति और परंपराएं नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप में पहुंच सकें। इसके अतिरिक्त महोत्सव में स्टार नाइट, भजन संध्या, खेलकूद प्रतियोगिताएं, भव्य शोभायात्रा, कवि सम्मेलन सहित अनेक सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर भी सहमति बनी।
कत्यूर घाटी का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। कभी यह क्षेत्र प्राचीन कत्यूर वंश की राजधानी रहा, जिसने कुमाऊँ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव को जीवंत रखने के उद्देश्य से कत्यूर महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो अब पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है।
बैठक में उपस्थित दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट ने कहा कि कत्यूर महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है और इसके सफल आयोजन के लिए उनका पूरा सहयोग रहेगा। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने कहा कि उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि इस बार नगर पंचायत पहली बार इस महोत्सव के आयोजन की जिम्मेदारी निभा रही है और इसे भव्य रूप देने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या ने भी आयोजन के लिए अपनी ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल ने कहा कि प्रशासन की ओर से महोत्सव के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।
इस दौरान जिला पर्यटन अधिकारी गौतम ने जानकारी दी कि महोत्सव के आयोजन के लिए विभाग के पास 9 लाख 43 हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध है, जिसका उपयोग विभिन्न सांस्कृतिक और व्यवस्थागत कार्यक्रमों के संचालन में किया जाएगा।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी सहभागिता कर यह संकल्प लिया कि नौ लाख कत्यूरों की पावन धरती पर आयोजित होने वाला यह महोत्सव इस वर्ष और अधिक भव्य, आकर्षक और ऐतिहासिक स्वरूप में मनाया जाएगा, जिससे कत्यूर घाटी की सांस्कृतिक गरिमा देशभर में और अधिक उजागर हो सके ।