रिठाड़ में बाघ का बढ़ता आतंक: खेतों में काम कर रहीं महिलाओं पर लगातार हमले, ग्रामीणों में दहशत
बागेश्वर ,गरुड़ । जनपद बागेश्वर के गरुड़ तहसील अंतर्गत रिठाड़ ग्राम में इन दिनों बाघ का आतंक इस कदर गहराता जा रहा है कि ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। विशेष रूप से खेतों में काम करने वाली महिलाएं भय के साये में जीने को मजबूर हैं। बीते तीन दिनों के भीतर बाघ द्वारा लगातार तीन महिलाओं पर झपट्टा मारने की घटनाओं ने पूरे गांव में असुरक्षा और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खेतों में कार्यरत दीपा देवी, गंगा देवी और रेवती देवी पर अलग-अलग समय पर बाघ ने हमला करने का प्रयास किया। हालांकि, अन्य महिलाओं द्वारा समय रहते शोर मचाने और साहसिक हस्तक्षेप के कारण इन तीनों की जान बच पाई, लेकिन इन घटनाओं ने गांव की महिलाओं के मन में गहरा भय बैठा दिया है। अब स्थिति यह हो गई है कि महिलाएं खेतों में जाने से भी हिचकिचा रही हैं, जिससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है।
गौरतलब है कि इस समय क्षेत्र में सरसों सहित अन्य फसलें पककर तैयार हैं, वहीं जौ की कटाई के बाद धान की पौध तैयार करने का कार्य भी प्रारंभ होना है। ऐसे में खेतों में काम का दबाव अधिक होने के बावजूद बाघ के भय ने ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने खेतों के आसपास ही अपना ठिकाना बना लिया है, जिससे खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
सरपंच नीमा देवी ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि इन दिनों कृषि कार्य के चलते महिलाओं को देर रात तक खेतों में काम करना पड़ता है, लेकिन अब दिन के उजाले में भी बाघ का खतरा बना हुआ है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि क्षेत्र में टीम भेजकर निरीक्षण किया जाए और बाघ को पकड़ने के लिए शीघ्र पिंजरा लगाया जाए।
वहीं पीड़ित महिलाओं ने भी वन विभाग से गुहार लगाई है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विभागीय लापरवाही की स्थिति में वे अपना कार्य छोड़कर आंदोलन करने को बाध्य होंगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीव-मानव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि वन विभाग कितनी तत्परता से इस चुनौती का सामना करता है और कब तक ग्रामीणों को इस भयावह स्थिति से राहत मिल पाती है।
