गरुड़ में बेकाबू बंदरों का आतंक: घर के आंगन में व्यक्ति पर हमला, दूसरी बार बने शिकार, दहशत में नगरवासी
गरुड़, बागेश्वर। गरुड़ नगर क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। शनिवार शाम टीटबाजार निवासी एक व्यक्ति पर बंदरों के झुंड ने उस समय हमला कर दिया, जब वह अपने ही घर के आंगन में खड़े थे। हमले में व्यक्ति घायल हो गया, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। घटना ने नगरवासियों की चिंता और बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार टीटबाजार निवासी 53 वर्षीय दिनेश सिंह फर्स्वाण, पुत्र स्वर्गीय कृष्ण सिंह फर्स्वाण, शनिवार सायंकाल अपने घर के आंगन में खड़े थे। इसी दौरान बंदरों का एक झुंड उनके घर के समीप से गुजर रहा था। बताया जाता है कि बंदरों को वहां से हटाने का प्रयास करते समय अचानक एक बंदर ने पीछे से उन पर झपट्टा मार दिया। बंदर ने अपने नाखूनों से उनकी पीठ और कमर पर वार कर दिया, जिससे वह घायल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और शोर मचाकर बंदर को वहां से भगाया।
घटना के बाद परिजन तत्काल घायल दिनेश सिंह को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ ले गए। वहां चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सपना राजपूत ने बताया कि घायल व्यक्ति की पीठ और कमर पर बंदर के नाखूनों के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। आवश्यक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आए दिन लोगों पर हमले तथा घरों में घुसकर उत्पात मचाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घरों से बाहर निकलने में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दिनेश सिंह फर्स्वाण पर लगभग एक वर्ष पूर्व भी बंदरों के झुंड ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया था, जिससे समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी बैजनाथ एम.एस. गुसाईं ने कहा कि नगर क्षेत्र में बंदरों की समस्या को लेकर वन विभाग और नगर पंचायत समय-समय पर आवश्यक कदम उठाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि घायल व्यक्ति को शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी।
नगर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बंदरों की आक्रामक गतिविधियों ने अब प्रशासन के समक्ष प्रभावी और स्थायी समाधान खोजने की चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग और प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
