स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में प्रशासन का फोकस, जिलाधिकारी ने गरुड में संजीवनी फल प्रसंस्करण इकाई का किया निरीक्षण
बागेश्वर, गरुड । जनपद में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार संवर्धन एवं स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने गुरुवार को विकासखंड गरुड़ स्थित संजीवनी आजीविका स्वायत्त सहकारिता की फल प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण कर उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों तथा विपणन व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इकाई में तैयार किए जा रहे विभिन्न फल आधारित उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया का जायजा लेते हुए उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं बाजार में संभावनाओं को लेकर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला सदस्यों से संवाद स्थापित कर उनके अनुभवों और कार्यप्रणाली को समझा तथा उनके प्रयासों की सराहना की।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्थानीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बाजार में स्थापित करने के लिए गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने उत्पादों के मानकीकरण, आकर्षक पैकेजिंग तथा प्रभावी ब्रांडिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं की बदलती मांग और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादों को विकसित करना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों की पहचान मजबूत होगी, बल्कि महिला समूहों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकेगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि फल प्रसंस्करण इकाई के व्यावसायिक विस्तार के लिए ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही विपणन तंत्र को अधिक सुदृढ़ बनाकर स्थानीय फलों से निर्मित उत्पादों को क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास तेज किए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसी इकाइयां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, खंड विकास अधिकारी, रीप के सहायक प्रबंधक (सेल्स) कमल कांत जोशी, तारा प्रसाद, आजीविका समन्वयक महेन्द्र सिंह नेगी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन गरुड़ के ब्लॉक मिशन प्रबंधक, क्षेत्रीय समन्वयक तथा संजीवनी क्लस्टर लेवल फेडरेशन, शांति बाजार के कार्मिक उपस्थित रहे। प्रशासन की यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक शक्ति में परिवर्तित करने तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
