August 5, 2026

पूरे जिले से कामकाज ठप कर सितारगंज पहुंच गए थे कर्मचारी


रुद्रपुर । तहसील सितारगंज में सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की ट्रैप की कार्रवाई के विरोध में राजस्व और कलेक्ट्रेट कर्मचारी खुलकर मैदान में आ गए थे। गुरुवार को पूरे जिले के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी सितारगंज तहसील परिसर पहुंच गए। पूरे जिले का कामकाज ठप हो गया। गुरुवार सुबह राजस्वकर्मियों ने तहसील के मुख्य गेट पर भी ताले जड़कर पुलिस के लिए एक और अवरोधक तैयार कर दिया। 20 घंटे तक गेट पर ताले जड़कर पुलिस को भीतर नहीं जाने दिया। तहसील भवन में केवल पांच विजिलेंस कर्मचारी और दो सितारगंज के पुलिस कर्मी थे। सितारगंज में तहसील व कोतवाली आमने-सामने हैं। एक ओर जहां जिलेभर के राजस्वकर्मियों की भीड़ रही, वहीं दूसरी ओर जिलेभर से आई पुलिस तैनात रही। दोपहर तक कोतवाली छावनी क्षेत्र बना रहा। गुरुवार तड़के आंदोलनरत राजस्वकर्मियों ने तहसील भवन में बने शौचालयों में ताले जड़ दिए। आरोपी तहसील कर्मियों के परिजन भी तहसील परिसर में रात से धरने पर बैठे रहे। संग्रह अमीन संघ, मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संगठन, लेखपाल संघ समेत विभिन्न संगठनों ने विजिलेंस की कार्रवाई को विधि विरुद्ध और फर्जी बताते हुए मोर्चा खोल दिया था।संग्रह अमीन संघ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर, उत्तराखण्ड लेखपाल संघ की प्रांतीय उपाध्यक्ष मंजू बिष्ट, उत्तराखण्ड मिनिस्ट्रियल कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष गौरव रावत ने गुरुवार सुबह डीएम एवं उच्चाधिकारियों को भेजे ज्ञापन में कहा कि बुधवार शाम लगभग 03:30 बजे तहसील के वसूली कक्ष में संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा और सहायक राजस्व लेखाकार भूपेंद्र सिंह राणा द्वारा राजस्व बकायेदार से बकाया धनराशि वसूल कर सरकारी रसीद काटी जा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान विजिलेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और नियमानुसार वसूली जा रही धनराशि को रिश्वत बताकर दोनों कर्मचारियों को ट्रैप कर लिया। कर्मचारी संघों का कहना है कि संग्रह अमीन और सहायक लेखाकार की ओर से वसूली पूरी तरह से ‘कलेक्शन मैनुअल की धारा 127’ के प्रावधानों के अनुसार थी। संघ के अनुसार, शिकायतकर्ता पहले से ही आपराधिक किस्म का व्यक्ति और राजस्व बकायेदार है, जिसके खिलाफ कोतवाली सितारगंज समेत कई अन्य थानों में एफआईआर दर्ज हैं। विजिलेंस टीम को कलेक्शन मैनुअल और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली की सही जानकारी नहीं है। संगठन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सतर्कता अधिष्ठान द्वारा प्रथम दृष्टया बिना किसी साक्ष्य, तथ्य और निष्पक्ष जांच के केवल खानापूर्ति और विभाग की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। यह सरकारी कार्य में लगे कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न है। कर्मचारियों ने मांग की कि इस प्रकरण की जांच के लिए राजस्व, पुलिस और वित्त विभाग के एक-एक अधिकारी को शामिल कर एक संयुक्त जांच दल का गठन किया जाए। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दोष सिद्ध नहीं होता, तब तक संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की विधिक कार्रवाई या गिरफ्तारी न की जाए।

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