गरुड़ में गरमाया गर्भवती महिला की मौत का मामला , निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग
मोहन सिंह मेहता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में प्रसव के बाद महिला की मौत पर उत्तराखंड क्रांति दल ने उठाए गंभीर सवाल
जिलाधिकारी को भेजे पत्र में उपचार से लेकर रेफर किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग, मेडिकल बोर्ड से वास्तविक मृत्यु-कारण निर्धारित करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आग्रह
बागेश्वर, गरुड़ । मोहन सिंह मेहता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बैजनाथ (गरुड़) में प्रसव के बाद एक गर्भवती महिला की मौत का मामला गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। घटना को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल, जनपद बागेश्वर की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गई है। संगठन ने पूरे प्रकरण में उपचार की प्रक्रिया, चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक जांच, उपलब्ध संसाधनों तथा महिला को उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर किए जाने में लगे समय समेत कई बिंदुओं पर तथ्य सामने लाने की मांग की है।
पत्र के अनुसार, दिनांक 9 अगस्त 2026 की रात मोहन सिंह मेहता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ, गरुड़ में एक गर्भवती महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के उपरांत अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उसे बागेश्वर अस्पताल रेफर किए जाने का उल्लेख पत्र में किया गया है, जहां पहुंचने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। संगठन ने इस घटना को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा है कि प्रसव एवं प्रसवोत्तर अवधि महिलाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील होती है और ऐसी स्थिति में समय पर चिकित्सकीय निगरानी तथा आवश्यक उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।
“मौत के वास्तविक कारण सामने आने जरूरी”
उत्तराखंड क्रांति दल के ब्लॉक अध्यक्ष एवं अधिवक्ता गिरीश कोरंगा की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मामले में किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप तय करने के बजाय तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संगठन का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि महिला की अस्पताल में भर्ती के समय चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, प्रसव के दौरान और उसके बाद उसकी निगरानी किस प्रकार की गई तथा तबीयत बिगड़ने पर तत्काल कौन-कौन से उपचार किए गए।
पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि महिला की हालत गंभीर होने की स्थिति में उसे उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए किस समय रेफर किया गया और रेफर करने के निर्णय में कितना समय लगा। साथ ही, यदि रेफर किया गया था तो एंबुलेंस की व्यवस्था कितने समय में हुई और महिला को उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कितना समय लगा, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
उपचार से लेकर रेफर किए जाने तक हर कड़ी की जांच की मांग
संगठन ने जिलाधिकारी से जांच में विशेष रूप से निम्न बिंदुओं को शामिल करने का आग्रह किया है—
1. भर्ती के समय की स्थिति:
महिला को अस्पताल में किस समय भर्ती किया गया तथा भर्ती के समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति और आवश्यक जांच क्या थी।
2. उपचार का पूरा विवरण:
भर्ती से लेकर मृत्यु तक महिला का उपचार किन चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने किया और किस समय कौन-सा उपचार दिया गया।
3. आवश्यक जांच हुई या नहीं:
महिला की स्थिति के अनुसार आवश्यक चिकित्सकीय जांच समय पर कराई गई थी अथवा नहीं।
4. अस्पताल की सुविधाओं की स्थिति:
अस्पताल में आवश्यक दवाइयां, चिकित्सा उपकरण, ऑक्सीजन, ब्लड/ब्लड बैंक संबंधी सुविधाएं तथा अन्य आपातकालीन व्यवस्थाएं उस समय उपलब्ध थीं या नहीं।
5. गंभीर स्थिति में रेफरल:
यदि महिला की स्थिति गंभीर थी तो उसे उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए किस समय रेफर किया गया और रेफर करने में किसी प्रकार की देरी हुई या नहीं।
6. एंबुलेंस और यात्रा का समय:
रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस कितने समय में उपलब्ध हुई और महिला को उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में कितना समय लगा।
7. ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ:
घटना के समय अस्पताल में कौन-कौन से चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित थे और उनकी भूमिका क्या रही।
8. मेडिकल रिकॉर्ड की जांच:
ओपीडी/आईपीडी रजिस्टर, केस शीट, प्रसव संबंधी रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, दवा वितरण रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड, रेफरल रिकॉर्ड तथा अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए।
9. वास्तविक मृत्यु-कारण का निर्धारण:
महिला की मौत के वास्तविक एवं चिकित्सकीय कारण का निर्धारण करने के लिए आवश्यक होने पर मेडिकल बोर्ड/विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जाए।
10. लापरवाही मिलने पर कार्रवाई:
यदि जांच में किसी चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी या अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही, उपचार में कमी अथवा कर्तव्य में चूक सामने आती है तो नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
11. पीड़ित परिवार को न्याय:
जांच की निष्पक्ष रिपोर्ट मृतका के परिजनों को उपलब्ध कराई जाए और यदि चिकित्सकीय लापरवाही प्रमाणित होती है तो पीड़ित परिवार को नियमानुसार उचित सहायता एवं न्याय दिलाया जाए।
अस्पताल के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर जोर
पत्र में एक महत्वपूर्ण मांग यह भी की गई है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अस्पताल के सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि किसी भी अभिलेख में परिवर्तन अथवा उसके नष्ट होने की संभावना न रहे।
संगठन ने कहा है कि इस तरह के मामलों में रिकॉर्ड ही यह स्पष्ट करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि मरीज को किस समय कौन-सी चिकित्सा सुविधा दी गई, कौन-सी जांच हुई, कौन-सी दवा दी गई और स्थिति बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए।
सिर्फ जांच नहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की भी हो समीक्षा
मामले को व्यापक जनहित से जोड़ते हुए पत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं एवं प्रसव संबंधी मामलों में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकों की उपलब्धता, आपातकालीन सेवाओं, आवश्यक दवाओं, ऑक्सीजन, रक्त संबंधी व्यवस्थाओं तथा समय पर रेफरल व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आम जनता के लिए प्राथमिक और महत्वपूर्ण चिकित्सा सहारा हैं। ऐसे में वहां उपलब्ध संसाधनों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा होना जरूरी है, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सके।
“दोषी कौन है, यह जांच तय करे”
उत्तराखंड क्रांति दल की मांग का मुख्य केंद्र यही है कि घटना के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। जांच में चिकित्सकीय तथ्यों, अस्पताल के रिकॉर्ड, ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ, उपचार की समय-सीमा, रेफरल प्रक्रिया और उपलब्ध संसाधनों को सामने रखा जाए।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा कर्तव्य में चूक प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, जबकि यदि उपचार प्रक्रिया नियमानुसार पाई जाती है तो वास्तविक चिकित्सकीय कारण भी स्पष्ट रूप से सामने आए।
जनता की नजर अब जांच पर
गर्भवती महिला की प्रसव के बाद हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबसे अहम सवाल यही है कि महिला की हालत कब बिगड़ी, उस समय चिकित्सकीय टीम ने क्या कदम उठाए, आवश्यक उपचार कितनी जल्दी मिला, रेफरल का निर्णय कब लिया गया और उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कितना समय लगा।
इन सवालों के जवाब किसी आरोप या अनुमान से नहीं, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञ जांच और निष्पक्ष तथ्यों से सामने आने चाहिए। यही मृतका के परिवार को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।
