नई दिल्ली में गूंजा उत्तराखंड का लोकसंगीत और सिनेमा, उत्कृष्ट कलाकारों को मिला सम्मान
देहरादून । राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम सभागार में रविवार को उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा, लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के सम्मान में यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स-2026 का भव्य आयोजन हुआ। समारोह में वर्ष 2025 के दौरान उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा और संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, फिल्मकारों, गायकों, संगीतकारों और अन्य प्रतिभाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड की कला एवं संस्कृति से जुड़े कई प्रतिष्ठित कलाकार, फिल्मकार, संगीतज्ञ और कला प्रेमी मौजूद रहे। प्रसिद्ध वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कई फिल्मों और संगीत एलबमों में अभिनय कर चुके बिमल बहुगुणा को यंग उत्तराखंड लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं प्रसिद्ध लोकगायक, जागर सम्राट एवं पद्मश्री प्रीतम भरतवाण को गोपाल बाबू गोस्वामी लीजेंडरी सिंगर अवार्ड प्रदान किया गया।फिल्म श्रेणी में वर्ष 2025 के उत्कृष्ट योगदान के लिए सुनील सिंह को फिल्म ‘रैबार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार संयुक्त रूप से करिश्मा शाह को ‘घपरोल’ और कल्याणी गंगोला को ‘द्वी होला जब साथ’ के लिए दिया गया। कैलाश कंडवाल को ‘घपरोल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक, दीपक बंगवाल को इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार, दीपक रावत को ‘खोली का गणेश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता और सुमन गौड़ को ‘रैबार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री चुना गया। धर्मेंद्र सिसोदिया को ‘रैबार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ छायाकार, शिशिर उनियाल और भगत सिंह सैनी को सर्वश्रेष्ठ कहानी तथा शिशिर उनियाल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। ‘रैबार’ को वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया, जबकि फिल्म के पृष्ठभूमि संगीत के लिए विभू काशिव को सम्मानित किया गया।
संगीत श्रेणी में भी उत्तराखंड की प्रतिभाओं का दबदबा रहा। वरिष्ठ लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को ‘कु रै होला छुंयाल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार मिला। कुशाल सिंह नील को ‘पंचाचूली देश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार, धर्मेंद्र सिंह जेठा को ‘मेरी माया रौली’ के लिए सर्वश्रेष्ठ छायांकन, गणेश मर्तोलिया को ‘पंचाचूली देश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक और रूचि जंगपांगी को इसी गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार प्रदान किया गया। सिद्ध भोज को ‘आख्युं बात’ के लिए सर्वश्रेष्ठ वीडियो निर्देशक, मोहित घिल्डियाल को ‘कु रै होला छुंयाल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष अभिनय और करुणा श्रेष्ठ को ‘पंचाचूली देश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनय का सम्मान मिला। ‘पंचाचूली देश’ को सर्वश्रेष्ठ गीत/निर्माण संस्था की श्रेणी में भी सम्मानित किया गया।
समारोह में ‘रैबार’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के
सम्मान के साथ एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। अभिव्यक्ति की कार्यशाला की ओर से दी गई यह राशि उत्तराखंड में सार्थक और गुणवत्तापूर्ण क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। आयोजन के दौरान लोक कलाकारों ने पारंपरिक गायन और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां देकर उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और भारत मंडपम का सभागार उत्तराखंड की लोकधुनों से गूंज उठा।
समारोह का सबसे आकर्षक क्षण तब आया, जब सुप्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने पहली बार यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स के मंच पर अपने लोकप्रिय गीतों की लाइव प्रस्तुति दी। नेगी के मंच पर पहुंचते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक उनके गीतों पर झूमते नजर आए। समारोह ने यह संदेश भी दिया कि उत्तराखंड का क्षेत्रीय सिनेमा, लोकसंगीत और लोकसंस्कृति राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, नई पीढ़ी के कलाकारों और फिल्मकारों को मंच देने के साथ उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति और संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। भारत मंडपम में आयोजित यह समारोह उत्तराखंड की कला, संस्कृति, सिनेमा और संगीत के सम्मान का यादगार उत्सव बन गया।
