September 16, 2026

सीडीओ ने शामा-लीती क्षेत्र का किया स्थलीय निरीक्षण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर

कीवी उत्पादन, ट्राउट मत्स्य पालन, डेयरी इकाइयों और लघु उद्यमों की ली जानकारी; कोल्ड स्टोरेज की प्रस्तावित भूमि का भी किया निरीक्षण

बागेश्वर। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नरेश कुमार ने बुधवार को विकासखंड कपकोट के सुदूरवर्ती शामा-लीती क्षेत्र का स्थलीय भ्रमण कर विभिन्न विकास योजनाओं और स्वरोजगारपरक गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों, काश्तकारों, स्थानीय उद्यमियों एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से संवाद करते हुए स्थानीय स्तर पर उत्पादित कृषि एवं अन्य उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

सीडीओ ने भ्रमण के दौरान विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति, प्रगति, उत्पादन, आय और रोजगार सृजन की जानकारी ली। उन्होंने काश्तकारों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं को जाना तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कीवी उद्यान और पॉलीहाउस का किया निरीक्षण

भ्रमण के दौरान उद्यान विभाग की योजनांतर्गत ग्राम लीती में श्री खीम सिंह द्वारा दो एकड़ भूमि में स्थापित कीवी उद्यान एवं पॉलीहाउस का निरीक्षण किया गया। सीडीओ ने कीवी की फसल की स्थिति, उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने काश्तकार से उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों तथा फसल के बाजार से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की।

इसी क्रम में ग्राम शामा में श्री भवान सिंह द्वारा 10 नाली भूमि में स्थापित कीवी उद्यान का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया। सीडीओ ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कीवी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की संभावनाओं का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और विपणन पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को काश्तकारों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने तथा उत्पादों के लिए बेहतर बाजार से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कोल्ड स्टोरेज के लिए प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण

सीडीओ ने ग्राम नौकोड़ी में प्रस्तावित कोल्ड स्टोरेज की भूमि का भी संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्र में उत्पादित फल एवं सब्जियों को सुरक्षित रखने तथा किसानों को उचित समय पर अपनी उपज बेचने में कोल्ड स्टोरेज की संभावित भूमिका पर जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों से प्रस्तावित स्थल से जुड़ी आवश्यकताओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए परियोजना से संबंधित कार्यों को नियमानुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। स्थानीय स्तर पर भंडारण की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को उपज के तत्काल विपणन की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

REAP के लघु उद्यमों और डेयरी इकाइयों की जानी प्रगति

भ्रमण के दौरान ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत संचालित एवं वित्तपोषित विभिन्न लघु उद्यमों, सीबीओ स्तरीय उद्यमों (WSE) तथा डेयरी इकाइयों का भी निरीक्षण किया गया।

सीडीओ ने इन इकाइयों की वर्तमान स्थिति, आय, उत्पादन एवं रोजगार सृजन की जानकारी लेते हुए लाभार्थियों से संवाद किया। उन्होंने यह भी जाना कि योजनाओं से जुड़ने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की आजीविका में किस प्रकार बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन और विपणन व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।

रेनबो ट्राउट मत्स्य पालन का भी लिया जायजा

सीडीओ नरेश कुमार ने ग्राम लीती में मत्स्य विभाग द्वारा क्लस्टर स्तर पर संचालित रेनबो ट्राउट मत्स्य पालन टैंकों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मत्स्य पालकों से ट्राउट उत्पादन की क्षमता, मछलियों के आहार प्रबंधन, रखरखाव तथा बाजार एवं विपणन व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली।

मत्स्य पालकों ने उत्पादन और विपणन से जुड़ी विभिन्न आवश्यकताओं एवं समस्याओं से भी अधिकारियों को अवगत कराया। सीडीओ ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कीवी उत्पादन, ट्राउट मत्स्य पालन, डेयरी और अन्य स्थानीय उद्यम ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे प्रयासों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार, ब्रांडिंग और बेहतर मूल्य से जोड़ना आवश्यक है।

स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार पर जोर

भ्रमण के दौरान सीडीओ ने स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित कृषि एवं अन्य उत्पादों की अपनी अलग पहचान है। जरूरत इस बात की है कि उत्पादकों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बेहतर पैकेजिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।

उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं का लाभ पात्र किसानों, काश्तकारों और स्थानीय उद्यमियों तक पहुंचाने तथा जमीनी स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।

इस दौरान खंड विकास अधिकारी कपकोट, उद्यान विभाग के अधिकारी, जिला परियोजना प्रबंधक REAP, जिला मत्स्य निरीक्षक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।