September 22, 2026

जखेड़ा की मसाला यूनिट ने रची कामयाबी की खुशबू, पहले ही साल ₹3.95 लाख का कारोबार

स्थानीय मसालों को मिला बाजार, ग्रामीणों की आजीविका को नई उड़ान; ₹2.58 लाख का लाभ अर्जित

गरुड़, बागेश्वर। पहाड़ के गांवों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों को रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत आधार बनाने की दिशा में जखेड़ा क्षेत्र की लाहुरघाटी आजीविका स्वायत्त सहकारिता, तिलसारी के माध्यम से संचालित मसाला यूनिट मिसाल बनकर उभरी है। वर्ष 2025-26 में स्थापित इस यूनिट ने अपने पहले ही वर्ष में ₹3,95,500 का कारोबार कर ग्रामीण उद्यमिता की संभावनाओं को सामने रखा है। यूनिट ने इसी अवधि में ₹2,58,516 का लाभ अर्जित किया।

धनिया से हल्दी तक, स्थानीय उत्पादों की बढ़ी कीमत

यूनिट में धनिया, जीरा, हल्दी और मिर्च सहित स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल को प्रसंस्कृत कर पैक किया जा रहा है। इससे जहां स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल रहा है, वहीं कच्चे माल में मूल्य संवर्धन कर ग्रामीणों के लिए आय के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं।

यूनिट में स्थापित मशीन की क्षमता लगभग 30 किलोग्राम प्रति घंटा है। परियोजना के लिए कुल ₹10 लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई, जिसमें परियोजना सहयोग, बैंक ऋण और स्वयं की अंशपूंजी शामिल है।

पहले साल में ही कारोबार और मुनाफे ने बढ़ाया भरोसा

मसाला यूनिट का पहले ही वर्ष ₹3.95 लाख का टर्नओवर और ₹2.58 लाख का लाभ अर्जित करना ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्यमों की आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। यूनिट की गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं। साथ ही मसालों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन की पूरी प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा मिल रहा है।

REAP ने दिखाई गांव से बाजार तक की राह

ग्रामीण उद्यम वेगवृद्धि परियोजना (REAP) के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को स्थानीय संसाधनों, कौशल और उपलब्ध संभावनाओं के आधार पर आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जखेड़ा की मसाला यूनिट इसी पहल का परिणाम है, जहां स्थानीय उत्पादों को बेहतर रूप देकर बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

यह पहल केवल मसालों के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के संसाधनों को गांव की आमदनी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर सृजित होने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

पहाड़ की खुशबू अब बाजार तक

जखेड़ा की यह यूनिट बताती है कि यदि स्थानीय संसाधनों को तकनीक, प्रशिक्षण, पूंजी और बाजार से जोड़ा जाए तो गांवों में ही रोजगार और उद्यमिता की मजबूत नींव तैयार की जा सकती है। पहाड़ के खेतों में पैदा होने वाले मसालों से लेकर बाजार में बिकने वाले पैकेट तक—जखेड़ा की यह पहल स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।