सरकारी जमीनों की नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की मांग
रुद्रपुर । उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को भंग करने और इसके माध्यम से सरकारी जमीनों की प्रस्तावित अथवा चल रही नीलामी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। बुधवार को यूकेडी पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम मनीष बिष्ट को सौंपा।
उन्होंने सरकारी भूमि के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र एवं पारदर्शी समीक्षा कराने की मांग की। ज्ञापन में यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष आनंद सिंह असवाल ने कहा कि सीमित भू-संसाधनों वाले उत्तराखंड में सरकारी भूमि सार्वजनिक संपत्ति है। इसे केवल राजस्व अर्जित करने के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारी जमीन के हस्तांतरण अथवा व्यावसायिक उपयोग से पहले स्थानीय जनता के हित, पर्यावरणीय प्रभाव और सामाजिक प्रभावों का समुचित मूल्यांकन किया जाना जरूरी है।
यूकेडी ने मांग की कि यूआईआईडीबी को तत्काल भंग किया जाए और उसके माध्यम से सरकारी जमीनों की प्रस्तावित या चल रही नीलामी पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही सरकारी भूमि के हस्तांतरण और व्यावसायिक उपयोग से संबंधित सभी निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। यूकेडी ने सरकारी भूमि के संबंध में अब तक किए गए आवंटनों, प्रस्तावों और नीलामी प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। दल ने निजी व्यावसायिक हितों के लिए सरकारी भूमि के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रभावी भूमि संरक्षण नीति बनाने पर भी जोर दिया।
यहां जिलाध्यक्ष जीवन सिंह नेगी, केंद्रीय उपाध्यक्ष आनंद सिंह असवाल, जिला संरक्षक राजेंद्र प्रसाद जोशी, सर्वोच्च सलाहकार समिति के सदस्य एमसी पांडे, जिला महामंत्री भानूप्रताप मेहरा, महिला नगर अध्यक्ष बबिता बोरा, महामंत्री इंदू बोरा रहे।
