बागेश्वर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक कल
कुमाउनी बोली-भाषा, लोकसंस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार पर होगा मंथन
बागेश्वर। कुमाउनी बोली-भाषा, संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं विकास को लेकर प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन-2026 के आयोजन की तैयारियों को लेकर रविवार, 27 सितंबर 2026 को बागेश्वर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक प्रेस क्लब सभागार, बागेश्वर में होगी, जिसमें सम्मेलन के सफल आयोजन को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा प्रचार-प्रसार समिति के संयोजक किशन सिंह मलड़ा ने बताया कि कुमाउनी भाषा और संस्कृति को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने तथा नई पीढ़ी को अपनी बोली-भाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर कुमाउनी भाषा सम्मेलन का आयोजन विभिन्न स्थानों पर किया जाता रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन बागेश्वर में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।
उन्होंने बताया कि इससे पूर्व वर्ष 2021 में भी बागेश्वर में राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। सम्मेलन के माध्यम से कुमाउनी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के साथ-साथ लोक साहित्य, लोकगीत, लोककला, रीति-रिवाज, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
प्रस्तावित तीन दिवसीय सम्मेलन में कुमाउनी भाषा के साहित्यकारों, विद्वानों, लोक कलाकारों, संस्कृति प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भाषा के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे लोगों की भागीदारी की संभावना है। सम्मेलन के माध्यम से कुमाउनी भाषा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने, इसके अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने और कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के प्रयास किए जाएंगे।
रविवार को होने वाली बैठक में सम्मेलन की तिथि, आयोजन स्थल, कार्यक्रम की रूपरेखा, विभिन्न सत्रों, अतिथियों के आमंत्रण, व्यवस्थाओं और आयोजन की सफलता के लिए आवश्यक तैयारियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आयोजकों ने भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ ही सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, कलाकारों और कुमाउनी बोली-भाषा के प्रति रुचि रखने वाले लोगों से बैठक में उपस्थित होकर सुझाव और सहयोग देने का आह्वान किया है।
समिति के संयोजक किशन सिंह मलड़ा ने सभी भाषा प्रेमियों एवं संस्कृति से जुड़े लोगों से बैठक में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर सम्मेलन को सफल बनाने में सहयोग और आशीर्वाद प्रदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुमाउनी बोली-भाषा और संस्कृति केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि कुमाऊं की पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से इस विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
