छात्रसंघ चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप पर जताई चिंता
बागेश्वर । डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के दौरान बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और पूर्व छात्र नेताओं ने चिंता जताई है। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप से छात्रसंघ चुनाव का स्वरूप बदलता जा रहा है। चुनाव के दौरान विवाद, मारपीट और हिंसा की घटनाएं सामने आना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा बनाना उचित नहीं है। राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव पहले भी होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप बढ़ने से चुनाव प्रक्रिया कई बार टकराव की स्थिति में पहुंच जाती है।कॉलेज में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों में मारपीट और हिंसा की घटनाएं उचित नहीं हैं। उन्होंने लिंग्दोह समिति की सिफारिशों के आधार पर हो रहे छात्रसंघ चुनावों के मौजूदा स्वरूप पर भी सवाल उठाए।राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व छात्र नेता हीरावल्लभ भट्ट, रमेश पांडे, कृषक और भुवन कांडपाल ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक अखाड़ा बनाया जा रहा है। इसके कारण लगातार विवाद और घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, जिससे उनका कॅरियर प्रभावित होने का खतरा रहता है। छात्रसंघ चुनाव छात्रों के मुद्दों और समस्याओं को उठाने का माध्यम होना चाहिए, न कि राजनीतिक दलों के प्रभाव का केंद्र।
