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October 27, 2026

पलायन रोकने के लिए सरकारें ठोस और कारगर नीति नहीं बना पाईः रावत, गाँव मे रहने वालों को मिले प्रोत्साहन राशि

देहरादून,  ( आखरीआंख )  यूकेडी डेमोक्रेटिक के केंद्रीय उपाध्यक्ष और पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी रहे डीपीएस रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र से लोगों के पलायन के चलते कई गांव जनविहीन हो चुके हैं और कई जनविहीन होने के कगार पर हैं। उनका कहना है पिछले 18 वर्षों में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में पलायन घटने के बजाए बढ़ा है।
 पलायन को रोकने के दिशा में भाजपा और कांग्रेस की सरकार कोई ठोस नीति नहीं बना पाईं। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र से पलायन को रोकने के लिए ठोस और कारगर नीति बनाए जाने की जरूरत है। डीपीएस रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी कि अलग राज्य बनने पर पलायन रूक सकेगा और लोगों को रोजगार की तलाश में दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद पलायन की समस्या और गंभीर हुई है। रोजगार की तलाश में और सुख-सुविधाओं के लिए लोग लगातान पलायन करते जा रहे हैं और गांव खाली होते जा रहे हैं। गांवों में घर खंडहर हो चुके हैं और खेत बंजर हो चुके हैं। 18 सालों में भाजपा और कांग्रेस का यहां राज रहा है। दोनों दल बारी-बारी से राज कर रहे हैं। इन दोनों दलों का राज्य के हितों से कोई सरोकार नहीं रहा है। गांवों में रोजगार के साधन सृजित करने में सरकार नाकाम रही है। पर्वतीय क्षेत्र के लिए उद्योग नीति में कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। गांवों में सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्याोगों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाए जाने की जरूरत है ताकि जो लोग खेतों को बंजर छोड़ चुकें हैं वे फिर से खेती शुूरु कर सकें। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मृल्य दिए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। जिन कारणों से राज्य से पलायन हुआ है उन समस्याओं को दूर किया जाए। गांवों को सड़कों से जोड़ा जाए, अच्छे स्कूल खोले जाएं, स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया जाए। गांवों में खेती करने वालों और रहने वालों को प्रोत्साहन राशि दी जाए, जिससे लोगों का अपने गांवों की ओर रूझान बढ़े और लोग गांवों में वास आ सकें। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्र के विकास के लिए यहां के जन सरोकारों से वास्ता रखने वालों और पहाड़ की चिंता करने वालों को जिताकर भेजना चाहिए, जिससे वे यहां के अनुकूल नीतियां बना सकें।
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