March 6, 2026

श्रद्धांजलि, हरियाली और सहयोग की मिसाल बनी माँ नंदा स्मृति वाटिका

बागेश्वर गरुड । वर्ष 2011-12 में स्थापित माँ नंदा स्मृति वाटिका आज न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन चुकी है, बल्कि सामाजिक चेतना और जनसहभागिता की प्रेरणादायी मिसाल भी बन रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री देव सुमन जी की 81वीं पुण्यतिथि पर वाटिका में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण प्रेमियों ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण से हुई, जहाँ विगत वर्षों में नष्ट हो चुके पौधों के स्थान पर सघन चौड़ी पत्तीदार व सदा बहार पौधों का पुनः रोपण किया गया। देवकी लघु वाटिका के साथ-साथ इस पहल में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, जन शिक्षण संस्थान बागेश्वर, यूथ विंग के 25 युवा सदस्य, और वन विभाग के अधिकारी एवं स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता निभाई।

इस अवसर पर वन क्षेत्र अधिकारी श्री प्रदीप कांडपाल, श्री प्रवेश नौटियाल, श्री नरेंद्र खेतवाल, वन पंचायत के पूर्व सरपंच श्री गोविंद , एवं किशन मलड़ा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। युवाओं में रवि उप्रेती, हेमंत मलड़ा, सौम्या कनवाल, श्वेता, सौरव, चंदा नेगी, विजय प्रताप, निखिल, और मोहन सिंह कोरंगा जैसे नाम प्रमुख रहे, जिन्होंने समर्पण के साथ पौधरोपण में सहभागिता की।

कार्यक्रम के अंत में आगंतुकों को जामुन, चंदन व आंवला जैसे बहुउपयोगी पौधे उपहारस्वरूप प्रदान किए गए। यह पहल न केवल वन्य जैव विविधता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि चीड़ के बीच उगते बाँज, फल्यात्, बाँस, रिठा, तून और आंवला जैसे पौधों के साथ यह वन क्षेत्र अब भूस्खलन की रोकथाम, जल संरक्षण, और पशु-पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है।

वन क्षेत्र अधिकारी श्री प्रदीप कांडपाल ने इस क्षेत्र के और विस्तार में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। अंत में किशन मलड़ा ने सभी सहयोगियों का आभार प्रकट करते हुए माँ नंदा स्मृति वाटिका को और समृद्ध बनाने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।

यह आयोजन हमें यह संदेश देता है कि अगर जनसहयोग और समर्पण हो, तो पर्यावरण संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि एक उत्सव बन सकता है। श्री देव सुमन की स्मृति को समर्पित यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।