शहीद दिवस : शहीद राम सिंह बोरा के नाम पर इंटर कॉलेज का सपना अधूरा: 23 की उम्र में देश के लिए शहीद, 23 साल बाद भी नहीं मिला पूरा सम्मान
बागेश्वर गरुड । विशेष रिपोर्ट ( अर्जुन राणा ) कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए शहीद राम सिंह बोरा की शहादत को दो दशक से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी उनके नाम पर घोषित इंटर कॉलेज और शहीद स्मृति पार्क केवल सरकारी फाइलों और घोषणाओं तक सीमित रह गए हैं।
साल 2002 में उनके सम्मान में खोला गया जूनियर हाईस्कूल आज 115 छात्रों के साथ शिक्षण कार्य कर रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी और इंटर कॉलेज के दर्जे की प्रतीक्षा में यह संस्थान विकास की राह तक रहा है। सरकार ने इंटर कॉलेज और पार्क बनाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन आज तक एक ईंट तक नहीं रखी गई।
23 की उम्र में सर्वोच्च बलिदान, बदले में वादों की वीरानी
10 पैरा कमांडो यूनिट के वीर सपूत राम सिंह बोरा मात्र 23 वर्ष की आयु में कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उत्तराखंड के भगरतोला गांव के इस लाल ने देश के लिए जान कुर्बान की, लेकिन सरकार की ओर से की गई घोषणाएं आज तक अधूरी हैं।
आज शहीद की पत्नी अपने बच्चे के साथ रानीखेत में निवास करती हैं ।
उनके परिवार और गांववालों को लगा था कि सरकार इस बलिदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्थल बनाएगी, लेकिन दो दशकों बाद भी गांव उसी मोड़ पर खड़ा है—जहां केवल इंतजार है।
विद्यालय बना पर संसाधनों का अभाव, इंटर कॉलेज का दर्जा अभी तक सपना
शहीद की स्मृति में बना विद्यालय 2002 में खोला गया, 2007 में वित्तीय स्वीकृति और 2013 में राजकीय दर्जा मिला। लेकिन इंटर कॉलेज का सपना आज भी अधूरा है। छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन आधारभूत संरचना, कक्षाएं, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला सब आज भी नदारद हैं।
परिवार में आक्रोश, गांव में निराशा
शहीद के भाई सेवानिवृत्त सुबेदार बलवंत सिंह बोरा कहते हैं, “सरकार ने पार्क और कॉलेज की घोषणा करके बस औपचारिकता निभाई। न कोई अधिकारी आया, न कोई काम शुरू हुआ। क्या शहीद का सम्मान इतना सस्ता हो गया है?”
गांव के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और पीपीएमजीईए अनुग्रहण समिति के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट ने कहा शासन से संपर्क किया गया हैं कि ठोस कदम उठाया जाये ।
अब नहीं चाहिए खोखले वादे, चाहिए न्यायपूर्ण कार्रवाई
सरकार और प्रशासन से अब निवेदन नहीं, सख्त सवाल किए जा रहे हैं
क्यों नहीं बना शहीद के नाम पर इंटर कॉलेज?
कहां गई घोषणाओं की फाइलें?
कब तक शहीदों के परिवार केवल धैर्य के सहारे बैठेंगे?
आज जरूरत है कि घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक कार्य किया जाए। शहीद राम सिंह बोरा को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मानी जाएगी जब उनके नाम पर इंटर कॉलेज और स्मृति पार्क तथ्य नहीं, वास्तविकता बनेंगे।
आवाज उठाएं, न्याय दिलाएं
यह खबर केवल जानकारी नहीं—एक अपील है। आइए, हम सब मिलकर उन हाथों को मजबूर करें जो फाइलों में शहीदों की यादों को दबा रहे हैं।
आज समस्त द्योनाई घाटी इस शहीद दिवस पर यह प्रतिज्ञा करती हैं कि हम शब्दों से नहीं, संकल्प से श्रद्धांजलि दें।
