March 11, 2026

गरुड भाजपा में सियासी भूकंप, 6 बीडीसी व 2 मंडल अध्यक्षों सहित दर्जनों इस्तीफे

अर्जुन राणा

बागेश्वर/गरुड़ । गरुड़ ब्लॉक में राजनीति ने ऐसा करवट बदला है कि पूरे इलाके में सियासी पारा उबाल मार रहा है। भाजपा के किले में दरार अब इतनी गहरी हो गई है कि दो मंडल अध्यक्ष, व्यापार मंडल अध्यक्ष, मंडल महामंत्री, नगर पंचायत सभासद समेत दो दर्जन से ज्यादा भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ताओ ने जिलाध्यक्ष को अपने 2 इस्तीफे ठोक दिए।
भाजपा का स्थानीय संगठन पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी के विरोध में उतर आया हैं।

एक तरफ राज्य दर्जा मंत्री शिव सिंह बिष्ट हर रोज़ बैठकों का दौर चला रहे हैं, समर्थकों को साध रहे हैं, और हर हाल में प्रमुख की सीट भाजपा के पाले में डालना चाहते हैं। अब देखना काफी दिलचस्प होगा कि वे अपनी पार्टी में कितना डैमेज कंट्रोल कर पाते हैं।
उनके लिए अब कुछ विकल्प ही बचे हैं जैसे कि पार्टी अनुशासन का उदाहरण देकर जो कि कुछ वर्षों पूर्व इसी विधानसभा क्षेत्र में आजमाया गया था। या फिर वे दोनों से अपने 2 समर्थकों के साथ परेड करवा सकते है और अंतिम विकल्प के रूप में पार्टी में प्रमुखता से अपना 2 दावा जता रहे दोनों उम्मीदवारो को किनारे कर पार्टी के ही तीसरे प्रत्याशी को प्राथमिकता दे सकते है।

दूसरी तरफ पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण भी अपने पत्ते खोल चुके हैं और भाजपा की अंदरूनी कलह में पार्टी के लिए जीत का रास्ता तलाश रहे हैं।

पिछली बार भाजपा को वॉकओवर देने वाली कांग्रेस इस बार पूरी ताकत से मैदान में है।
देवेंद्र परिहार की अगुवाई में कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि भाजपा की बगावत से बने इस सुनहरे मौके को भुनाकर गरुड़ ब्लॉक की गद्दी हथियानी है।

चाय की दुकानों से लेकर खेतों की मेड़ों तक बस एक ही चर्चा हो रही हैं कि “भाजपा अपनी लड़ाई हार रही है या कांग्रेस सच में कुछ कर दिखाएगी?”

लोग भी जानना चाहते हैं कि आखिर कुर्सी पर बैठेगा कौन।

विकास के मुद्दे पीछे, सियासत आगे

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, बिजली – सब जस के तस।

कोल्ड स्टोरेज का सपना अब तक सपना ही।

नशाखोरी युवाओं की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है।

स्थानीय लोग कहते हैं “नेताओं की लड़ाई में हम फिर से भूल जाएंगे कि हमें असल में चाहिए क्या ?

आने वाले दिनों में गरुड़ ब्लॉक प्रमुख की सीट का चुनाव हाई-वोल्टेज ड्रामा से कम नहीं होगा। भाजपा की गुटबाजी, कांग्रेस का पलटवार और जनता की चुपचाप होती गणना सब मिलकर यह मुकाबला 2025 का सबसे गर्म चुनावी रण बना देंगे।