Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 13, 2026

प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से गहरा नाता,गढ़वाली कुमाउनी में जुड़ने की कोशिश


देहरादून ।   सिर पर पहाड़ी टोपी और भाषण में जगह-जगह गढ़वाली कुमाऊनी बोली। उत्तराखंड के रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर अंदाज पहाड़ीपन से घुला-मिला दिखा। उन्होंने गढ़वाली कुमाऊनी के कई-कई वाक्य बोले। वो भी कई बार। अक्सर प्रधानमंत्री उत्तराखंड के कार्यक्रमों में पहाड़ी बोली-भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं, मगर आज के भाषण में उन्होंने जितनी गढ़वाली कुमाऊनी बोली, उतनी कभी नहीं बोली थी। ये ही वजह रही, कि उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बार और भी गहरा कनेक्ट महसूस किया।
प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण की शुरूआत की और कहा-देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली। अपने भाषण के बीच में प्रधानमंत्री ने जब फिर से गढ़वाली में बोलना शुरू किया, तो इसने लोगों को और रोमांचित कर दिया। प्रधानमंत्री बोले-पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण मे पहाड़ के लोक पर्वों, लोक परंपराओं और महत्वपूर्ण आयोजनों को भी शामिल किया। इस क्रम में उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र किया।

हालांकि जो टोपी मोदी जी को पहनाई गई थी वह वास्तव में पहाड़ी टोपी नही कहलाती हैं। पहाड़ी टोपी जो सबसे ज्यादा पहले प्रचलन में थी वह सफेद कपड़े की बनी होती थी और उसे सिर में थोड़ा तिरछा करके पहना जाता था। लेकिन अब समय बदलने के साथ 2 हमने अपने सिर पर दुसरो की टोपी को स्वीकार कर लिया है। इसी को कहते है टोपी पहनाना!!!

Advertisement