पानी, सड़क, बिजली और गुलदार के डर से लेकर प्रशासनिक लापरवाही तक—गरुड़ तहसील दिवस में जनता ने खोली समस्याओं की पूरी फाइल
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गरुड़ (बागेश्वर)।। गरुड़ तहसील में आयोजित तहसील दिवस सोमवार को महज औपचारिक बैठक न रहकर जनता के आक्रोश, उम्मीदों और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गया। पहली बार उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल की अध्यक्षता में आयोजित इस तहसील दिवस में क्षेत्र की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आई। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और अधिकारियों के बीच हुई इस सीधी बातचीत में पानी, सड़क, बिजली, जंगली जानवर, स्वास्थ्य सेवाएं, शराब की ओवररेटिंग, बंदर आतंक और प्रशासनिक उदासीनता जैसे तमाम मुद्दे गूंजते रहे।
तहसील परिसर में सुबह से ही शिकायतकर्ताओं की भीड़ यह संकेत दे रही थी कि लोग लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की बाट जोह रहे हैं। तहसीलदार निशा रानी, नायब तहसीलदार भूपाल गिरी, खंड विकास अधिकारी बी.बी. जोशी, थानाध्यक्ष कैलाश बिष्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में उपजिलाधिकारी ने एक-एक शिकायत को गंभीरता से सुना और कई मामलों में मौके पर ही विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए।
बैठक के दौरान जल जीवन मिशन से जुड़ी खामियां सबसे प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आईं। ज्येष्ठ प्रमुख नंदन थापा ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजों में योजना भले पूरी दिखाई जा रही हो, लेकिन धरातल पर लोगों को आज भी पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। इसी कड़ी में शोबन सिंह ने बताया कि आधे इंच की पाइपलाइन के कारण 21 लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों में गुलदार के बढ़ते आतंक ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ाई। शिकायतकर्ता दिनेश नेगी ने क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता और उससे फैले भय का मुद्दा उठाते हुए बताया कि शवदाह स्थल पर बकरी की खाल डाले जाने की घटनाओं से जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे जनहानि की आशंका बनी हुई है। इस पर प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं की बात करें तो कोट वाली मार्ग की नालियों की बदहाल स्थिति, गरुड़ गंगा में फैलता कूड़ा, सड़क किनारे अव्यवस्थित रूप से खड़े वाहन और बिजली की लो वोल्टेज की समस्या ने लोगों की नाराजगी साफ झलकती रही। उपजिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नालियों की नियमित सफाई कराई जाए और विद्युत आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
पत्रकार हरीश जोशी ने क्षेत्र में बंदरों की बढ़ती समस्या को गंभीर सामाजिक संकट बताते हुए कहा कि इससे खेती को भारी नुकसान हो रहा है और आमजन का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। वहीं राजस्व निरीक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी कुल दस समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं, जिनमें भूमि, रास्तों और आपदा से जुड़े मामले शामिल रहे।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सवाल उठे। अस्पताल से संबंधित विषयों पर चर्चा के दौरान उपजिलाधिकारी ने दवाइयों और अन्य संसाधनों के स्टॉक रजिस्टर की नियमित जांच के निर्देश दिए और डॉक्टर हरेंद्र को व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा। पिछले तहसील दिवसों में उठाए गए मुद्दों की समीक्षा के दौरान जाखेड़ा मार्ग की खराब हालत पर भी तीखी चर्चा हुई। सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर उपजिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जूनियर इंजीनियरों को निर्देश दिए कि सड़क से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए और भूस्खलन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित हो।
शिकायतों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। नवीन कुमार ने शराब की दुकानों पर ओवररेट बिक्री के साथ-साथ बिजली और पानी की मांगों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। नवीन गिरी ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जिस पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत समाधान के आदेश दिए गए।
पत्रकार अखिल जोशी ने गोपाल बनवासी के घर को जाने वाले अवैध मार्ग का मामला उठाया, जबकि ग्राम पंचायतों में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों की समस्या पर एडीओ पंचायत को सुधार के निर्देश दिए गए।
तहसील दिवस में राजनीतिक तीखापन भी देखने को मिला। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट गिरीश कोरंगा ने तहसील परिसर में शौचालय और सोलर वाटर पंप की आवश्यकता बताते हुए आरोप लगाया कि उनके द्वारा पूर्व में सौंपे गए 101 समस्याओं के ज्ञापन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो तहसील दिवस केवल “समस्या कलेक्शन सेंटर” बनकर रह जाएगा।
त्रिलोक बुटोला ने किन्नरों द्वारा जबरदस्ती मांग की घटनाओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर प्रशासन ने संज्ञान लेने की बात कही। वहीं लघु सिंचाई विभाग से जुड़े एक मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
इस तहसील दिवस में कुल 16 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें 10 शिकायतें सीधे जनता द्वारा और 6 शिकायतें राजस्व उप निरीक्षकों द्वारा प्रस्तुत की गईं। उपजिलाधिकारी वैभव कांडपाल ने सभी विभागों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध और स्थायी समाधान किया जाए, ताकि भविष्य में वही शिकायतें दोबारा सामने न आएं।
कुल मिलाकर गरुड़ तहसील दिवस प्रशासन और जनता के बीच संवाद का एक मजबूत मंच बनकर सामने आया, जहां लोगों ने बेखौफ होकर अपनी बात रखी और प्रशासन ने भी जवाबदेही का संदेश दिया। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों का असर धरातल पर कितना दिखाई देता है।
