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October 12, 2026

मनरेगा के स्थान पर लाये नये बिल की प्रतियां जलाई गई


नई टिहरी । उत्तराखण्ड किसान सभा की टिहरी जिला कौंसिल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (वीबी-जीरामजी बिल) को लोकसभा में पास कराने का विरोध करते हुए, प्रस्तावित बिल की प्रतियां जलाई। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित कार्यक्रम में किसान सभा नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित बिल मनरेगा के मूल स्वरूप को पूरी तरह से खत्म कर देता है, जो एक सार्वभौमिक मांग आधारित कानून है तथा काम का सीमित अधिकार देता है। नया बिल कानूनी तौर पर केन्द्र सरकार को मांग के अनुसार फंड आवंटित करने की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त करता है। सरकार का गारंटीड रोजगार को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का दावा सिर्फ दिखावा है। यह बिल जॉब कार्ड के युक्तिकरण के नाम पर ग्रामीण परिवारों के बड़े हिस्से को बाहर करने का रास्ता खोलता है। कृषि के चरम मौसम के दौरान सरकारों को 60 दिनों तक रोजगार निलंबित करने की अनुमति देने वाला प्रावधान ग्रामीण परिवारों को तब काम से वंचित कर देगा जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरुरत होगी। एक बड़ी चिंता फंडिंग पैटर्न में प्रस्तावित बदलाव है। यह बिल राज्यों के लिए मजदूरी भुगतान के लिए केन्द्र की जिम्मेदारी को 100 प्रतिशत से घटाकर केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 की साझी व्यवस्था कर देता है। साथ ही बेरोजगारी भत्ता और देरी मुआवजे पर खर्च वहन करने की जिम्मेदारी राज्यों पर डाल देता है। इससे राज्यों पर असहनीय बोझ डालता है, जबकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं देता है। इस बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इस दौरान किसान सभा के किरगणी मण्डल मजिला सचिव कृपाल सिंह कठैत के नेतृत्व में गुलाब सिंह कठैत, कृष्णा कठैत, मंगल सिंह कठैत, गीता कठैत और अवतार सिंह कठैत तथा सगवाणगांव में सफर सिंह नेगी, शैला नेगी व नई टिहरी में राज्य उपाध्यक्ष भगवान सिंह राणा, दिल्ला राणा ने कार्यक्रम में भागीदारी निभाई।

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