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November 8, 2026

बागेश्वर में सादगी से मनाया गया पाँचवां राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय स्थापना दिवस

बागेश्वर।
पाँचवां राष्ट्रीय कुमाउनी पुस्तकालय स्थापना दिवस सादगीपूर्ण ढंग से देवकी लघु वाटिका, मंडलसेरा (बागेश्वर) में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में नवोदित कवियों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वाटिका की संरक्षक देवकी देवी ने उपस्थित नवोदित कवियों को मौसमी फल एवं मिष्ठान वितरित करते हुए अपनी बोली, भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बोली-भाषा और संस्कृति का किसी भी प्रकार से मजाक उड़ाना आने वाले समय में अत्यंत कष्टकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कुमाउनी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उत्तराखंड सरकार से अविलंब प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से भी पहाड़ी संस्कृति और भाषाओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में किशन मलड़ा ने बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु दिनपत्रिका और कलम भेंट की तथा सभी से पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अधिक से अधिक निशुल्क सदुपयोग करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बोली-भाषा के साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण संरक्षण की सामान्य जानकारी हम सभी के लिए आवश्यक है।

इस अवसर पर रमा देवी, मनीषा, दिव्या, वैभव बिष्ट, करन, अंजली, हेमंत मलड़ा, देश दीपक सिंह, भजन सिंह, ममता, प्रकृति, इश्वरा, शंकर राम, किशन राम, टीना सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य कुमाउनी भाषा, साहित्य और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा।

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