May 31, 2026

युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने का संकल्प, विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जोशी ने किया जागरूकता का आह्वान


गरुड़, बागेश्वर। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सार्वजनिक पुस्तकालय गरुड़ में आयोजित जागरूकता गोष्ठी में व्यसनमुक्त समाज के संयोजक एवं उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता डीके जोशी ने युवाओं से तंबाकू समेत सभी प्रकार के नशों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है, जिससे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए जोशी ने कहा कि तंबाकू सेवन केवल एक आदत नहीं, बल्कि अनेक गंभीर बीमारियों और सामाजिक समस्याओं का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उन्हें नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराकर स्वस्थ और जागरूक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने व्यसनमुक्त समाज के निर्माण को समय की आवश्यकता बताते हुए युवाओं से नशामुक्ति अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
इस अवसर पर उन्होंने कोटपा एक्ट-2003 (COTPA Act) की विभिन्न धाराओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा-4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित है तथा उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा-5 के अनुसार सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष विज्ञापन, प्रोत्साहन और प्रायोजन पर रोक लगाई गई है। धारा-6 (क) के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है, जबकि धारा-6 (ख) के तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री वर्जित है। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित कर ही समाज को नशे के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया। गोष्ठी में पुस्तकालयाध्यक्ष चंद्रशेखर बड़सीला, प्रकाश पांडे सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल जागरूकता का माध्यम नहीं रहा, बल्कि एक स्वस्थ, सजग और व्यसनमुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प का भी प्रतीक बना।