आत्मनिर्भरता की राह पर युवा और महिलाएं
बागेश्वर । पहाड़ में सीमित कृषि संसाधनों, जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच मशरूम उत्पादन युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। इसी उद्देश्य से ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) बागेश्वर में 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 25 युवा और महिलाएं आधुनिक व जैविक तरीके से मशरूम उत्पादन की तकनीक सीख रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बटन, मिल्की और ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन की विधियां सिखाई जा रही हैं। साथ ही मशरूम की खेती के लिए आवश्यक तापमान, नमी, बीज चयन, खाद प्रबंधन, रखरखाव, उत्पादन प्रक्रिया और विपणन संबंधी जानकारी भी दी जा रही है।
कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें ऑर्गेनिक तरीके से मशरूम उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि कम लागत में बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन कर बाजार में अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सके। मास्टर ट्रेनर ममता मेहरा प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की बारीकियां सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन कम जगह, कम लागत और सीमित संसाधनों में आसानी से शुरू किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती को जंगली जानवरों से लगातार नुकसान पहुंच रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मशरूम उत्पादन आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।
