स्व.सोबन सिंह जीना की 117वीं जयंती पर भावपूर्ण आयोजन, पहाड़ प्रेम और समाज सेवा के आदर्शों को किया याद
बागेश्वर। कर्मयोग, समाज सेवा और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए आजीवन समर्पित रहे पूर्व पर्वतीय राज्य मंत्री, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय सोबन सिंह जीना की 117वीं जयंती मंगलवार को बागेश्वर स्थित कुमाऊँ केसरी पंडित बद्री दत्त पांडेय– सोबन सिंह जीना परिसर में पहली बार गरिमामय एवं भव्य कार्यक्रम के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन निदेशक डॉ. कमल किशोर जोशी के निर्देशन में किया गया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में किशन सिंह मलड़ा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. सोबन सिंह जीना के चित्र पर पुष्पांजलि एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। इसके बाद उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा भाकुनी ने प्रभावी ढंग से किया। उन्होंने स्व. जीना के जीवन, संघर्ष और समाज के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करते हुए एक भावपूर्ण कविता का भी पाठ किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
इस अवसर पर स्व. सोबन सिंह जीना के जीवन एवं योगदान पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उनके व्यक्तित्व, सामाजिक चेतना, पर्वतीय विकास और जनसेवा से जुड़े विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में कु. लक्षिता ने प्रथम, कु. अनामिका ने द्वितीय तथा राहुल कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
मुख्य अतिथि किशन सिंह मलड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. सोबन सिंह जीना का संपूर्ण जीवन पहाड़ और पहाड़वासियों के हितों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में वन अधिकारों को स्थानीय लोगों के लिए सरल और सुलभ बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने कहा कि जीना जी का जीवन वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
मलड़ा ने इस दौरान स्व. जीना के पैतृक गांव जौय, सीलिंग, सुनौला (ताकुला) तथा अल्मोड़ा स्थित उनके निवास ‘प्रेम कुटीर’ का उल्लेख करते हुए उनकी सादगी, जनसरोकार और मातृभूमि के प्रति गहरे लगाव को याद किया। उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से परिसर में पारिजात का पौधा रोपित किया गया। पौधरोपण के दौरान उसके संरक्षण का भी संकल्प लिया गया और इसे स्व. जीना के प्रकृति एवं पहाड़ प्रेम का प्रतीक बताया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कमल किशोर जोशी ने स्व. सोबन सिंह जीना के जीवनवृत्त पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज, शिक्षा, न्याय और पर्वतीय जनजीवन के उत्थान के लिए जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनकी जयंती को और अधिक व्यापक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा ले सके।
इस अवसर पर डॉ. पुष्पा, डॉ. हेमलता पांडेय, डॉ. नरेश बर्थवाल, गीता बर्थवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद्, समाजसेवी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन स्व. शोभन सिंह जीना के बताए मार्ग पर चलने और समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
