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October 12, 2026

बागेश्वर में तीन दशक का इंतजार खत्म कराने सड़क पर उतरेंगे सीमांतवासी

23 अगस्त को नरगोली से बेरीनाग तक बनेगी 8 किमी लंबी मानव श्रृंखला, तिरंगे के साथ गूंजेंगे नारे और ढोल-नगाड़े

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दो जनपदों के ग्रामीण दिखाएंगे विकास की जमीनी हकीकत; बोले—चांद तक पहुंच गया देश, लेकिन हम आज भी पक्की सड़क को तरस रहे

विधानसभा चुनाव से पहले काम शुरू नहीं हुआ तो कूलूर नदी में जलसमाधि की चेतावनी

बागेश्वर। देश जब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है और चंद्रमा तक पहुंचने का गौरव हासिल कर चुका है, वहीं सीमांत पहाड़ के हजारों ग्रामीण आज भी एक अदद पक्की सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब तीन दशक से नरगोली-चंतोला-पौंसा-पोस्ताला-बेरीनाग मोटर मार्ग के डामरीकरण और स्थायी सुधारीकरण की मांग को लेकर आवाज उठा रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सड़क की बदहाली के खिलाफ अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ देने की तैयारी है।

23 अगस्त, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों के सीमांत ग्रामीण नरगोली से बेरीनाग तक करीब आठ किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाएंगे। तिरंगे झंडों के साथ ढोल-नगाड़ों और नारों से सड़क के डामरीकरण की आवाज बुलंद की जाएगी। इस अनोखे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ युवा, महिलाएं, व्यापारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होंगे।

‘देश चांद पर पहुंच गया, हम सड़क के लिए संघर्ष कर रहे’

ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर मानव श्रृंखला बनाने का निर्णय महज विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शासन और सरकार को सीमांत क्षेत्रों की वास्तविक तस्वीर दिखाने का प्रयास है। उनका कहना है कि एक तरफ भारत अंतरिक्ष में लगातार इतिहास रच रहा है, दूसरी तरफ कमस्यारघाटी के ग्रामीण आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तीन दशक से संघर्ष कर रहे हैं।

नरगोली-चंतोला-पौंसा-पोस्ताला-बेरीनाग मोटर मार्ग बागेश्वर जिले की कमस्यारघाटी और पिथौरागढ़ के सीमांत पौंसा-पोस्ताला क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाता है। सड़क की खराब हालत के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात में स्थिति और विकट हो जाती है।

सड़क बदहाल, जिंदगी बेहाल

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की बदहाली का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होती है, विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी होती है और किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।

बारिश के दौरान सड़क की हालत खराब होने से कई स्थानों पर आवाजाही जोखिम भरी हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से लगातार मांग और आश्वासनों के बावजूद सड़क के डामरीकरण और स्थायी सुधारीकरण की दिशा में अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ।

पौंसा-पोस्ताला में बनी आंदोलन की रणनीति

मानव श्रृंखला की तैयारियों को लेकर पौंसा-पोस्ताला पंचायत घर में सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले बैठक आयोजित की गई। बैठक में बागेश्वर और पिथौरागढ़ दोनों जनपदों के पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में 23 अगस्त के कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के साथ ही आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

सड़क संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डीआर टम्टा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी क्षेत्रवासियों से स्वप्रेरणा से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। समिति ने स्पष्ट किया कि मानव श्रृंखला पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी।

मानव श्रृंखला के दौरान हाथों में तिरंगा, गूंजते नारे और गाजे-बाजे के साथ सड़क के डामरीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी एक गांव या व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरी कमस्यारघाटी और दोनों जनपदों के सीमांत क्षेत्रों की सामूहिक आवाज है।

चुनाव से पहले काम शुरू नहीं हुआ तो जलसमाधि की चेतावनी

आंदोलनकारियों ने अब अपनी मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यदि सड़क का काम धरातल पर शुरू नहीं किया गया तो कमस्यारघाटी के लोग कूलूर नदी में जलसमाधि जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाते आ रहे हैं। अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्हें सड़क पर डामरीकरण और स्थायी सुधारीकरण का वास्तविक काम शुरू होता हुआ दिखाई देना चाहिए।

दो जनपद, एक मांग और एकजुट सीमांत समाज

23 अगस्त की मानव श्रृंखला की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें बागेश्वर और पिथौरागढ़ दोनों जनपदों के ग्रामीण एक मंच पर नजर आएंगे। पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर युवाओं, महिलाओं और व्यापारियों तक को इसमें भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बनाने के लिए क्षेत्र के हर गांव तक संपर्क किया जा रहा है। समिति का मानना है कि जब तक सीमांत क्षेत्र की सामूहिक आवाज मजबूती से शासन तक नहीं पहुंचेगी, तब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है।

बैठक में ये लोग रहे मौजूद

बैठक में संघर्ष समिति के संरक्षक एवं पूर्व प्रधानाचार्य मनोहर सिंह रौतेला, गोविंद बल्लभ उपाध्याय, अजय उप्रेती, ग्राम प्रधान भूपाल राम, राजेश बनाई, भगवान राम, भास्कर कुमार, मनोज राठौर, हरीश डसीला, भगवान मेहरा, पूरन सिंह बोरा, भूपाल खाती, मनोज रौतेला, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुनील रावत, महेश राठौर, सुनील रौतेला, पंकज डसीला, मोहित उप्रेती, गोकुल नगरकोटी, राकेश रौतेला, तनूज उप्रेती, प्रवीण रौतेला, दीपक सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

अब आश्वासन नहीं, सड़क पर काम चाहिए

ग्रामीणों की मांग साफ है—तीन दशक का इंतजार अब खत्म होना चाहिए। उनका कहना है कि कच्ची और बदहाल सड़क के सहारे पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसके पक्का होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार तथा रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आएगा।

23 अगस्त को बनने वाली आठ किलोमीटर की मानव श्रृंखला के जरिए सीमांतवासी सरकार और प्रशासन को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी मांग अब सिर्फ एक सड़क की मांग नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के अधिकार की मांग बन चुकी है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर नरगोली से बेरीनाग तक उठने वाली यह आवाज अब शासन-प्रशासन के लिए कितना बड़ा संदेश साबित होती है, यह 23 अगस्त के आंदोलन के बाद तय होगा। लेकिन इतना साफ है कि तीन दशक से सड़क का इंतजार कर रहे सीमांतवासियों ने अब अपनी लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है।

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