कोट भ्रामरी मेले को लेकर बैजनाथ पुलिस अलर्ट, सुरक्षा से लेकर यातायात तक रहेगा कड़ा पहरा
प्रभारी निरीक्षक कैलाश सिंह नेगी ने पुलिसकर्मियों के साथ की बैठक, मंदिर परिसर से लेकर मेला स्थल तक विशेष निगरानी के निर्देश
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां भ्रामरी ने किया था असुरों का संहार, सदियों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना है कोट भ्रामरी धाम
गरुड़/बागेश्वर। उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले ऐतिहासिक कोट भ्रामरी मेले को लेकर बैजनाथ पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कमर कस ली है। आगामी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, यातायात, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया है। इसी क्रम में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को कोतवाली बैजनाथ परिसर में प्रभारी निरीक्षक कैलाश सिंह नेगी ने कोतवाली के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारीगणों के साथ बैठक कर मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक बागेश्वर जितेन्द्र मेहरा (IPS) के निर्देशन में मेले को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया। प्रभारी निरीक्षक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मेला ड्यूटी में तैनात प्रत्येक पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हें हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तत्पर रहेगा।
मंदिर परिसर और मेला स्थल पर रहेगी पैनी नजर
बैठक में निर्देशित किया गया कि मेले के दौरान कोट भ्रामरी मंदिर परिसर, मेला क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। भीड़ के बीच होने वाली छोटी घटनाओं को समय रहते नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
असामाजिक तत्वों, हुड़दंगियों और जेबकतरों पर नजर रखने के लिए सादे वस्त्रों में महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। पुलिस की यह व्यवस्था विशेष रूप से भीड़ वाले स्थानों में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने में महत्वपूर्ण होगी।
जाम से निपटने के लिए तैयार होगा यातायात प्लान
कोट भ्रामरी मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने के मद्देनजर यातायात व्यवस्था को लेकर भी पुलिस ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है।
प्रभारी निरीक्षक कैलाश सिंह नेगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यातायात रूट प्लान तैयार करने के साथ वाहनों की निर्धारित स्थानों पर ही व्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित कराई जाए। यातायात पुलिस और ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को इस बात पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं कि श्रद्धालुओं को अनावश्यक जाम का सामना न करना पड़े और आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग सुगम बना रहे।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की संख्या भी बड़ी होती है। इसे देखते हुए पुलिस ने अपने जवानों को विशेष रूप से शालीन, मर्यादित और सहयोगात्मक व्यवहार करने के निर्देश दिए हैं।
प्रभारी निरीक्षक ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को सहायता की आवश्यकता होने पर पुलिसकर्मी तत्काल मदद उपलब्ध कराएं। भीड़ में परिवार से बिछड़ने, किसी व्यक्ति के अस्वस्थ होने अथवा किसी अन्य आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
हुड़दंग और अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
मेले की शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वाले तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग करने, शांति व्यवस्था भंग करने अथवा अफवाह फैलाने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मेले की धार्मिक गरिमा और शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पौराणिक आस्था का केंद्र है कोट भ्रामरी धाम
सुरक्षा तैयारियों के बीच कोट भ्रामरी मेले का धार्मिक और पौराणिक महत्व भी इसे सामान्य मेलों से अलग पहचान देता है। कुमाऊं की लोक आस्था में कोट भ्रामरी देवी को शक्ति स्वरूपा मां भगवती के रूप में पूजा जाता है।
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार, कोट भ्रामरी धाम का संबंध देवी भ्रामरी और असुर शक्तियों के विनाश की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब एक शक्तिशाली असुर के अत्याचार से देवता और मनुष्य त्रस्त हो गए थे, तब देवी ने भ्रामरी स्वरूप धारण कर उसका संहार किया। देवी के इस स्वरूप को असंख्य भौरों/भ्रमरों से संबंधित शक्ति के रूप में वर्णित किया जाता है। इसी कारण यहां देवी की आराधना भ्रामरी अथवा भ्रामरी देवी के रूप में की जाती है।
स्थानीय मान्यता में यह भी कहा जाता है कि देवी की शक्ति इस क्षेत्र की रक्षा करती है और श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति तथा सुख-समृद्धि के लिए मां के दरबार में पहुंचते हैं। यही आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को इस धाम से जोड़ती रही है।
सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, कुमाऊं की लोकसंस्कृति का भी उत्सव
कोट भ्रामरी मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ कुमाऊं की लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मेले में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे अवसरों पर स्थानीय लोक परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, ग्रामीण बाजार और सांस्कृतिक गतिविधियों की झलक भी देखने को मिलती है। इसलिए कोट भ्रामरी मेला स्थानीय लोगों के लिए केवल पूजा-पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक मिलन और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
कई परिवारों और ग्रामीण समुदायों के लिए मेले का धार्मिक महत्व पीढ़ियों पुराना है। देवी के प्रति आस्था के साथ जुड़ी लोक मान्यताएं आज भी लोगों को बड़ी संख्या में इस पवित्र स्थल तक खींच लाती हैं।
आस्था के मेले में सुरक्षा का संकल्प
बैठक के अंत में प्रभारी निरीक्षक कैलाश सिंह नेगी ने सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को पूरी मुस्तैदी और जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि मेले में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को सुरक्षित महसूस करे और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर उसे तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध हो।
कोट भ्रामरी की धार्मिक आस्था, पौराणिक परंपरा और लोक संस्कृति से जुड़े इस ऐतिहासिक मेले को देखते हुए बैजनाथ पुलिस ने सुरक्षा, यातायात और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अब पुलिस की चुनौती भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ मेले की धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की सुविधा को बनाए रखने की भी होगी।
