September 22, 2026

अनियंत्रित विकास से घायल हिमालय’ पर परिचर्चा, शमशेर सिंह बिष्ट के योगदान को किया याद


अल्मोड़ा ।  डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट की आठवीं पुण्यतिथि पर ‘अनियंत्रित विकास से घायल हिमालय’ विषय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते अनियंत्रित विकास, पर्यटन, पर्यावरणीय बदलाव और पर्वतीय क्षेत्रों के सामने खड़ी चुनौतियों पर विचार रखे। इस दौरान डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट के सामाजिक आंदोलनों और जनसमस्याओं के लिए किए गए संघर्षों को भी याद किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए दयाकृष्ण कांडपाल ने कहा कि हिमालय के पर्वतीय भू-भाग में भू-राजनीतिक एकता के लिए शमशेर सिंह बिष्ट और उनके साथियों का योगदान अविस्मरणीय है। मुख्य वक्ता कुमार कलानंद मणि ने कहा कि डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट को चिपको आंदोलन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के आंदोलन को विकसित करने और मद्यपान जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष के लिए याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दिशा में पर्यावरणीय संकट लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार आज हवा और पानी के साथ अनाज की शुद्धता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने बोतलबंद पानी को नैनो प्लास्टिक का स्रोत बताते हुए आधुनिक विकास मॉडल के पर्यावरणीय प्रभावों पर चिंता जताई। डॉ. महेंद्र सिंह मिराल ने स्लाइड शो के माध्यम से हिमालय की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। पीसी तिवारी ने कहा कि शमशेर सिंह बिष्ट के साथ काम करते हुए उन्होंने सीखा कि सवालों के समाधान के लिए बोलना और संघर्ष करना जरूरी है। उन्होंने हिमालय से जुड़ी समस्याओं के लिए सरकारों की जवाबदेही तय किए जाने की बात कही। डॉ. निर्मल जोशी ने नैनीताल में हो रहे भू-धसाव पर चिंता जताई।कार्यक्रम में पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, एडवोकेट जगत रौतेला, अजयमित्र सिंह बिष्ट, बिशन दत्त जोशी, जंगबहादुर थापा, डॉ. वसुधा पंत, ब्रह्मानंद डालाकोटी, डॉ. जेसी दुर्गापाल, डॉ. निर्मल जोशी, आनंद सिंह बगड़वाल, मोहम्मद हारिस, डॉ. देव सिंह पोखरिया, महेश परिहार, शेखर लखचौरा, कविंद्र पंत, भावना जोशी, विनय किरौला, आशीष जोशी, संजय पांडे समेत अनेक लोग मौजूद रहे।