कार्यशैली को विश्वसनीय बनाए सीबीआई
आखरीआंख
अभी तक यह चर्चा ही थी कि राजनीतिक प्रभाव वाले आपराधिक मामलों की जांच करते समय केन्द्रीय जांच ब्यूरो की कार्रवाई जांच की कसौटी पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। लेकिन अब तो प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सीबीआई के कार्यक्रम में ही राजनीतिक प्रभाव वाले मामलों में उसकी कार्यशैली पर तंज कसते हुए उसे आईना दिखा दिया। राजनीतिक दबाव में आकर काम करने की सीबीआई की कार्यशैली बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड की जांच के दौरान ही नजर आने लगी थी।
बोफोर्स तोप सौदा दलाली कांड, सारदा चिट फंड कांड, मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से लेकर 2जी स्पेक्ट्रम तथा कोयला खदान आवंटन प्रकरण तक अनेक मामलों में जांच ब्यूरो शीर्ष अदालत की फटकार सुनने के बाद ही हरकत में आयी। इसके बावजूद चारा घोटाला और कोयला खदान आवंटन प्रकरण जैसे कुछ महत्वपूर्ण मामलों के अलावा राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील कई मामलों में जांच ब्यूरो आरोपियों को सजा दिलाने में विफल रहा है। केन्द्रीय जांच ब्यूरो इस समय वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे से लेकर मुजफरपुर आश्रय गृह यौन शोषण कांड और उन्नाव बलात्कार कांड की पीडि़ता के वाहन को ट्रक से टक्कर मारे जाने की घटना सहित अनेक संवेदनशील मामलों की जांच कर रहा है।
सारदा चिट फंड की जांच के सिलसिले में सीबीआई और कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के बीच तो जबरदस्त तनातनी हो गयी थी। बाद में न्यायालय के हस्तक्षेप पर राजीव कुमार पूछताछ के लिये सीबीआई के सामने पेश हुए।
मोइन कुरैशी और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रकरण के परिप्रेक्ष्य में सीबीआई के दो वरिष्ठतम अधिकारियों के बीच सार्वजनिक छिड़ी जंग और इसके परिणामस्वरूप विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की घटना जगजाहिर है। इस मामले से चर्चा मे आये सतीश बाबू सना को अब गिरतार किया जा चुका है। देश की शीर्ष अदालत तो जांच ब्यूरो को पिंजरे में बंद तोते की संज्ञा से पहले ही नवाज चुकी है।
अक्सर देखा गया है कि राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मामलों की जांच के शुरू में केन्द्रीय जांच ब्यूरो ढुलमुल रवैया अपनाता है। किसी न किसी वजह से ऐसे मामलों की जांच लंबी खिंचती रहती है। जांच ब्यूरो की कार्यशैली का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि मांस का निर्यात करने वाले एक कारोबारी की संदेहास्पद कारगुजारियों की जांच की प्रक्रिया ने देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी के एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन निदेशकों को अपनी चपेट में ले लिया।
देश के प्रमुख मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ कर अपवंचना की जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर आयकर विभाग ने एपी सिंह और पत्नी को नोटिस जारी किये। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने मोइन कुरैशी से जुड़े प्रकरण में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किये। एपी सिंह के उत्तराधिकारी बने जांच ब्यूरो के निदेशक रंजीत सिन्हा के निवास के आगंतुक रजिस्टर में भी मोइन कुरैशी के नाम की कई प्रविष्टियां थीं और वह भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
बोफोर्स तोप सौदे की जांच के दौरान जांच ब्यूरो की कार्यशैली में जो दीमक लगना शुरू हुआ उसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील सभी मामलों की जांच में महसूस किया जा सकता है। बोफोर्स तोप सौदा दलाली मामले में प्राथमिकी निरस्त होने के फैसले के सालों बाद उचतम न्यायालय में अपील दायर करना और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बरी करने के विशेष अदालत के फैसले को चुनौती नहीं देना आदि राजनीतिक दबाव में उसकी कार्यशैली को ही दर्शाता है।
इसी तरह, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, उनके सांसद पुत्र अखिलेश और प्रतीक यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच में सीबीआई का रवैया जगजाहिर है। उमीद है सीबीआई अपनी कार्यशैली को विश्वसनीय बनाएगी।
