स्टेफनी टेलर बनीं विश्व की नंबर वन वनडे महिला बल्लेबाज
स्टेफनी टेलर बनीं विश्व की नंबर वन वनडे महिला बल्लेबाज
दुबई ,। वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट टीम की कप्तान स्टेफनी टेलर पाकिस्तान के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन की बदौलत न केवल आईसीसी महिला वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग, बल्कि ऑल राउंडर में भी फिर से शीर्ष स्थान पर पहुंच गई हैं। आईसीसी ने ताजा महिला रैंकिंग जारी की है। आईसीसी की विज्ञप्ति के मुताबिक नवीनतम साप्ताहिक अपडेट में वेस्ट इंडीज-पाकिस्तान श्रृंखला के पहले दो एकदिवसीय मैचों के प्रदर्शन शामिल हैं।
30 वर्षीय स्टेफनी ने पाकिस्तान के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज के पहले मैच में बल्ले और गेंद से जलवा दिखाया था। उन्होंने पहले वनडे में बल्ले से नाबाद 105 रन बना कर और गेंद से तीन विकेट लेकर शानदार ऑल राउंड प्रदर्शन किया था और टीम को पांच विकेट से जीत दिलाई थी। अपने इस प्रदर्शन की बदौलत स्टेफनी को चार स्थानों का फायदा हुआ है, जिससे वह भारतीय कप्तान मिताली राज को पीछे छोड़कर नंबर एक पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा वह ऑल राउंडर रैंकिंग में दो स्थानों के फायदे के साथ शीर्ष स्थान, जबकि गेंदबाजी रैंकिंग में तीन स्थानों की छलांग के साथ 16वें नंबर पर पहुंच गई हैं।
अतीत में अलग-अलग समय में तीनों प्रारूपों (वनडे, टेस्ट, टी-20) सूचियों में नंबर एक पर रही स्टेफनी ने पहली बार मार्च 2012 में बल्लेबाजी रैंकिंग में पहले नंबर पर कब्जा किया था और आखिरी बार वह नवंबर 2014 में शीर्ष पर रही थी। आलराउंडर रैंकिंग में वह आखिरी बार जुलाई 2017 में पहले नंबर पर आईं थी।
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)आईसीसी टूर्नामेंटों की सह-मेजबानी में पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ शामिल होने का इच्छुक है बंगलादेश
ढाका , । बंगलादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) आईसीसी टूर्नामेंटों के आगामी 2024-31 चक्र में दो आईसीसी विश्व कप की संयुक्त रूप से मेजबानी के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के साथ हाथ मिलाने के लिए तैयार है। इससे पहले यह जानकारी सामने आई थी कि पीसीबी क्रमश: 2027 और 2031 विश्व कप की मेजबानी के लिए एसएलसी और बीसीबी के साथ एक संघ बनाना चाहता है। उल्लेखनीय है कि बीसीबी ने भी 15 जून को निदेशक मंडल की अपनी 10वीं बैठक में घोषणा की थी कि वह केवल 2025 चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी के लिए रुचि व्यक्त करेगा, यह देखते हुए कि बोर्ड के पास मेजबानी के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, जबकि बीसीबी के अध्यक्ष नजमुल हसन ने पुष्टि की है कि बीसीबी कुछ आईसीसी टूर्नामेंटों की सह-मेजबानी करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ बातचीत करेंगे।
बीसीबी ने फैसला लिया है कि वह आईसीसी मेन्स इवेंट्स (2024-2031) के लिए मेजबान चयन प्रक्रिया में भाग लेगा और इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बीसीबी के सीईओ निजामुद्दीन चौधरी की अध्यक्षता में एक प्रबंधन टीम का गठन किया गया है और इसमें प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए बोर्ड के निदेशक जलाल यूनुस और अहमद सज्जादुल आलम शामिल हैं।
पीसीबी के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर जलाल यूनुस ने एशियाई पड़ोसियों के साथ हाथ मिलाने की संभावना से इंकार नहीं किया है, क्योंकि भारत स्वतंत्र रूप से आईसीसी टूर्नामेंटों की मेजबानी करने में सक्षम है। ऐसे में उनके पास एकमात्र मौका अन्य दो बोर्डों के साथ गठजोड़ करना है। जलाल ने एक बयान में कहा, हम पहले ही कह चुके हैं कि हम आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करना चाहते हैं, जबकि हम अपने पड़ोसी देशों के साथ अन्य टूर्नामेंटों की सह-मेजबानी करने के लिए तैयार हैं। भारत के पूरी तरह से टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिए बोली लगाने की संभावना है, क्योंकि वह सक्षम है, क्योंकि उसके पास बुनियादी ढांचा है और उस स्थिति में अगर हमें सह-मेजबानी करनी है तो हमें इसे पीसीबी और एसएलसी के साथ करना होगा।
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स्मृति मंधाना ने भारतीय बल्लेबाजी समूह से प्रदर्शन में निरंतरता की मांग की
लं । भारतीय महिला टी-20 क्रिकेट टीम की उप कप्तान स्मृति मंधाना ने टीम के बल्लेबाजी समूह से अपने प्रदर्शन में निरंतरता की मांग की है। उनका मानना है कि टीम के स्तर को बढ़ाने के लिए अभी बहुत काम करना बाकी है।
स्मृति ने दौरे के आखिरी मैच से पहले कहा, इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 मैच में जीत टीम के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी, खास तौर पर मैच जीतने के लिए जिस तरह से हमने आखिरी पांच ओवरों में वापसी की। इस जीत ने गेंदबाजों और क्षेत्ररक्षकों के बहुत सारे चरित्र को दिखाया। यह कुछ ऐसा था जिसकी हमें जरूरत थी। जिस तरह से हमने तीसरे वनडे में और फिर दूसरे टी-20 में खेला वो हमारा आत्मविश्वास बढ़ाने में हमारी मदद करने वाला है, लेकिन हम सभी जानते हैं कि कल एक नया दिन होगा, इसलिए हमारे पास कुछ नहीं होगा, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे खिलाडिय़ों के लिए वहां जाने और सौ प्रतिशत देने और मैच जीतने का आत्मविश्वास अधिक होने वाला है।
उल्लेखनीय है कि भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 में शानदार वापसी करते हुए आठ रन से मैच जीत लिया था और तीन मैचों की श्रृंखला में 1-1 से बराबर कर ली थी। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने इस सीरीज में खुद को जीवित रखा है।
भारतीय उप कप्तान ने कहा, हरमनप्रीत कौर का फॉर्म में वापस आना और कुछ गेंदों पर अच्छे शॉट मारना भारतीय टीम के लिए बहुत अच्छी बात है। सच में यह जीत महत्वपूर्ण थी, जिसने हमें अगले मैच में टी-20 श्रृंखला जीतने और मल्टी फॉर्मेट सीरीज ड्रा करने की स्थिति में रखा है। एक टीम के तौर पर हमें कई चीजों पर काम करने की जरूरत है, खासकर बल्लेबाजी विभाग में। अगले सात महीने सच में महत्वपूर्ण होने वाले हैं। हमें अच्छे स्कोर बनाना शुरू करना होगा। अगर मैं एक दिवसीय प्रारूप की बात करूं तो हमें 250/260 से अधिक का स्कोर बनाना शुरू करना होगा जब आप लगातार पहले बल्लेबाजी कर रहे हों। बेशक हमारी गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में निरंतरता आ सकती है। हम शायद एक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हम उस विभाग में लगातार बने रह सकते हैं, इसलिए अगले सात महीने एकदिवसीय विश्व कप के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे। बेशक विश्व कप की तैयारियों के मामले में ऑस्ट्रेलिया सीरीज भी बड़ी होने वाली है।
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)टोक्यो जाने के लिए 126 सदस्यीय टीम अभी तक का ओलंपिक में हिस्सा लेने वाला सबसे बड़ा भारतीय दल होगा : भोला नाथ सिंह
रांची , । झारखंड हॉकी संघ के अध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने ओलंपिक्स के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की शानदार पहल का स्वागत करते हुए कहा कि टोक्यो जाने के लिए 126 सदस्यीय टीम अभी तक का ओलंपिक में हिस्सा लेने वाला सबसे बड़ा भारतीय दल होगा।
सिंह ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो, रीजनल आउटरीच ब्यूरो रांची तथा फील्ड आउटरीच ब्यूरो गुमला के संयुक्त तत्वावधान में टोक्यो ओलंपिक में भारत की भागीदारी विषय पर आयोजित वेबिनार में कहा कि टीम में अधिकतर खिलाड़ी ऐसे हैं जिनका ओलंपिक से पहले प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है और वह पदक जीतने के अच्छे दावेदार हैं। भारतीय पुरुष एवं महिला हॉकी टीम का भी बेहतर प्रदर्शन होने वाला है और टीम का रिजल्ट चौंकाने वाला हो सकता है। वहीं कुश्ती में तीन से चार मेडल तो पक्के लग रहे हैं। उन्होंने सभी देशवासियों से अनुरोध किया कि सभी खिलाडिय़ों का प्रोत्साहन करें और प्रार्थना करें कि वह विजयी होकर देश का नाम रोशन करें।
वेबिनार की वरिष्ठ वक्ता आई.पी.सी.ए की जनरल सेक्रेटरी सरोजिनी लकड़ा ने कहा कि कोविड-19 ने इस बार टोक्यो में ओलंपिक के आयोजन में काफी कठिनाइयां पेश की है, यहां तक कि इसे 1 साल के लिए स्थगित भी किया गया। हालांकि यह सभी के हित में था। इस बार हॉकी टीम से काफी उम्मीदें हैं और खास करके निक्की प्रधान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है जिनका यह दूसरा ओलंपिक होगा। चूंकि ओलंपिक के पीछे खेल भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है इसलिए मैं भारत तथा सभी भाग लेने वाले एथलीट से चाहूंगी कि वह स्पोर्ट्समैन स्पिरिट के तहत कंपीट करें और अपना बेस्ट दें।
लकड़ा ने कहा कि इस वक्त खिलाडिय़ों को कोच, अभिभावक तथा समाज का पूरा सपोर्ट मिलना बहुत ही जरूरी है, तभी वह मेडल जीत सकेंगे। सरकार का भी सपोर्ट अति-आवश्यक होता है, जिससे खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ता है। हालांकि इस बार सभी खिलाडिय़ों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना है और सुरक्षित तरीके से भाग लेते हुए मेडल जीतने का प्रयास करना है। चैंपियन बनने के लिए शरीर, दिमाग तथा इच्छाशक्ति का एक रूप होना अति आवश्यक है इसी से लोग स्पोर्ट्स के साथ-साथ समाज में भी चैंपियन साबित होते हैं।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी-आरओबी रांची के अपर महानिदेशक अरिमर्दन सिंह ने इस अवसर पर अतिथि वक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि आज का यह वेबिनार बहुत ही सार्थक एवं समसामयिक है, आज ही के दिन प्रधानमंत्री भी टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले भारतीय एथलीट्स से परिचर्चा करने वाले हैं। इस वर्ष उम्मीद जताई जा रही है कि हमारे देश के एथलीट्स पहले से काफी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और हमारी मेडल टैली भी सुधरेगी। अगर हम देखे तो झारखंड से भी तीरंदाजी और हॉकी में कई महिला एथलीट्स भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं जिनका शामिल होना बहुत ही उत्साहवर्धक है। उम्मीद है यह सभी एथलीट्स टोक्यो में देश के साथ राज्य का भी नाम रोशन करेंगे।
इससे पूर्व वेबिनार के आरंभ में क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी महविश रहमान ने कहा, ओलंपिक के इतिहास में भारत ने अब तक 28 मेडल अपने नाम किए हैं। इसमें नौ गोल्ड, सात सिल्वर और 12 कांस्य मेडल शामिल हैं। खिलाड़ी इस बार नए जोश और जज्बे के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली मन की बात में सबसे पहले ओलंपिक की ही बात की और उन्होंने इसके लिए एक क्विज का भी ऐलान किया।
)मोदी ने टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय एथलीटों के दल को दी अपनी शुभकामनाएं
नयी दिल्ली , । प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो ओलम्पिक में हिस्सा लेने जा रहे 126 सदस्यीय भारतीय दल के सदस्यों से बीती शाम को आभासी मुलाकात की और उन्हें खेलों के महाकुम्भ में अच्छे प्रदर्शन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।
श्री मोदी ने इस मौके पर कहा ,आपसे बात करके मुझे बहुत अच्छा लगा। वैसे सभी से बात नहीं हो पाई, लेकिन आपका जोश, आपका उत्साह पूरे देश के सभी लोग आज महसूस कर रहे हैं। कार्यक्रम में मेरे साथ उपस्थित देश के खेल मंत्री श्रीमान अनुराग ठाकुर जी, अब से कुछ दिन पहले तक खेल मंत्री के रूप में आप सबके साथ बहुत काम किया है। ऐसे ही हमारे वर्तमान कानून मंत्री श्रीमान किरण रिजीजू जी, खेल राज्यमंत्री हमारे युवा मंत्री हैं हमारी टीम के श्रीमान निशीथ प्रमानिक जी, स्पोर्ट्स से जुड़ी संस्थाओं के सभी प्रमुख, उनके सभी सदस्य, और टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने जा रहे सभी मेरे साथियों, सभी खिलाडिय़ों के परिजन, आज हमारी वर्चुअल बातचीत हुई है लेकिन, मुझे और अच्छा लगता यदि मैं आप सभी खिलाडियों को यहां दिल्ली के अपने घर में होस्ट करता, आप लोगों से रू-ब-रू मिलता। इसके पहले में हमेशा करता रहा हूं और मेरे लिए वह अवसर बड़ा उमंग का अवसर रहता है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण वह संभव नहीं हो पा रहा है। और इस बार आधे से अधिक खिलाड़ी हमारे पहले से विदेशों में उनकी ट्रेनिंग चल रही है। लेकिन वापस आने के बाद मैं आपको वादा करता हूं। आप सबके साथ में जरूर सुविधा के अनुसार समय निकालकर के मिलुंगा। लेकिन कोरोना ने बहुत कुछ बदल दिया है। ओलंपिक का साल भी बदल गया, आपकी तैयारियों का तरीका बदल गया, बहुत कुछ बदला हुआ है। अब तो ओलंपिक शुरू होने में सिर्फ 10 दिन बचे हैं। टोक्यो में भी एक अलग तरह का माहौल आपको मिलने वाला है।
प्रधानमंत्री ने कहा,साथियों,आज आपसे बातचीत के दौरान, देश को भी पता चला कि इस कठिन समय में भी देश के लिए आपने कितनी मेहनत की है, कितना पसीना बहाया है। पिछली मन की बात में मैंने आपमें से कुछ साथियों के इस परिश्रम की चर्चा भी की थी। मैंने देशवासियों से आग्रह भी किया था कि वो देश के खिलाडिय़ों के लिए, आप सबके लिए चीयर करें, आपका मनोबल बढ़ाएँ। मुझे ये देखकर आज खुशी होती है कि देश आपको चीयर कर रहा है। हाल के दिनों में हैशटैग चीयर-फॉर-इंडिया के साथ कितनी ही तस्वीरें मैंने देखी हैं। सोशल मीडिया से लेकर देश के अलग अलग कोनों तक,पूरा देश आपके लिए उठ खड़ा हुआ है। 135 करोड़ भारतीयों की ये शुभकामनाएँ खेल के मैदान में उतरने से पहले आप सभी के लिए देश का आशीर्वाद है। मैं भी अपनी ओर से आप को ढेर सारी शुभकामनायें देता हूँ। आप सभी को देशवासियों से लगातार शुभकामनाएं मिलती रहें इसके लिए नमो एप पर भी एक खास प्रावधान किया गया है। नमो एप पर जाकर भी लोग आपके लिए चीयर कर रहे हैं, आपके लिए संदेश भेज रहे हैं।
उन्होंने कहा, आपके साथ देशभर की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। और जब मैं आप सभी को एक साथ देख रहा हूं तो कुछ चीजें कॉमन नजर आ रही है। और जब मैं आपको देखता हूं तो कॉमन बातें है- बोल्ड , कॉंफिडेंट और पॉजिटिव . आपमें एक कॉमन फ़ैक्टर दिख रहा है- डिसिप्लिन , डेडिकेशन और डेटर्मिनेशन। आपमें कमिटमेंट भी है, कम्पेटिटिवेनेस्स भी है। यही चलिटीज़ , न्यू इंडिया की भी हैं। इसीलिए, आप सब न्यू इंडिया के रिफ्लेक्शन हैं, देश के भविष्य के प्रतीक हैं। आपमें से कोई दक्षिण से है, कोई उत्तर से है, कोई पूरब से है, तो कोई पूर्वोत्तर से है। किसी ने अपने खेल की शुरुआत गाँव के खेतों से की है, तो कई साथी बपचन से ही किसी स्पोर्ट्स अकैडमी से जुड़े रहे हैं। लेकिन अब आप सब यहाँ टीम इंडिया का हिस्सा हैं। आप सब देश के लिए खेलने जा रहे हैं। यही डाइवर्सिटी , यही टीम स्पिरिट ही एक भारत श्रेष्ठ भारत की पहचान है।
श्री मोदी ने कहा ,साथियों,आप सब इस बात के साक्षी हैं कि देश किस तरह आज एक नई सोच, नई अप्रोच के साथ अपने हर खिलाड़ी के लिए साथ खड़ा है। आज देश के लिए आपका मोटिवेशन बहुत महत्वपूर्ण है। आप खुलकर खेलें, अपने पूरे सामर्थ्य के साथ खेल सकें, अपने खेल को, अपनी टेकनीक को और निखार सकें, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। आपको याद होगा, ओलम्पिक के लिए एक हाइलेवेल कमेटी का गठन काफी पहले ही कर दिया गया था। टारगेट ओलिंपिक पोडियम स्कीम के तहत सभी खिलाडिय़ों को हर संभव मदद दी गई। आपने भी इसे अनुभव किया है। पहले की तुलना में जो बदलाव आज आए हैं, उन्हें भी आप महसूस कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा,मेरे साथियों,आप देश के लिए पसीना बहाते हैं, देश का झण्डा लेकर जाते हैं, इसलिए ये देश का दायित्व है कि आपके साथ डटकर खड़ा रहे। हमने प्रयास किया है। खिलाडिय़ों को अच्छे ट्रेनिंग कैंप्स के लिए, बेहतर इक्विपमेंट के लिए। आज खिलाडिय़ों को ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल एक्सपोजऱ भी दिया जा रहा है। स्पोर्ट्स से जुड़ी संस्थानों ने आप सबके सुझावों को सर्वोपरि रखा, इसीलिए इतने कम समय में इतने बदलाव आ पाये हैं।
उन्होंने कहा ,जैसे खेल के मैदान में मेहनत के साथ सही स्ट्रेटजी जुड़ जाती है तो जीत पक्की हो जाती है, यही बात ग्राउंड के बाहर भी लागू होती है। देश ने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियान चलाकर मिशन मोड में सही स्ट्रेटजी से काम किया तो परिणाम भी आप देख रहे हैं। पहली बार इतनी बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों ने ओलंपिक के लिए चलिफाई किया है। पहली बार इतने ज्यादा खेलों में भारत के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। कई खेल ऐसे हैं जिनमें भारत ने पहली बार चलिफाई किया है।
श्री मोदी ने कहा,हमारे यहाँ कहा जाता है- अभ्यासात् जायते नृणाम् द्वितीया प्रकृति:॥ अर्थात्, हम जैसा अभ्यास करते हैं,जैसा प्रयास करते हैं, धीरे धीरे वो हमारे स्वभाव का हिस्सा हो जाता है। इतने समय से आप सब जीतने के लिए प्रैक्टिस कर रहे हैं। आप सबको देखकर, आपकी इस ऊर्जा को देखकर कोई संदेह बचता भी नहीं है। आपको और देश के युवाओं का जोश देखकर ये कह सकता हूँ कि वो दिन दूर नहीं जब जीतना ही न्यू इंडिया की आदत बन जाएगी। और अभी तो ये शुरुआत है, आप टोक्यो जाकर जब देश का परचम लहराएंगे तो उसे पूरी दुनिया देखेगी। हाँ, ये बात जरूर याद रखनी है कि जीतने का प्रैशर लेकर नहीं खेलना है। अपने दिल-दिमाग को बस एक ही बात कहिए कि मुझे अपना बेस्ट परफॉर्म करना है। मैं देशवासियों से भी एक बार फिर कहूँगा,चीयर फॉर इंडिया। मुझे पूरा विश्वास है, आप सब देश के लिए खेलते हुये देश का गौरव बढ़ाएँगे, नए मुकाम हासिल करेंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद! मेरी बहुत – बहुत शुभकामनाएं और आपके परिवारजनों को मेरा विशेष प्रणाम। बहुत-बहुत धन्यवाद।
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अखिल हेरवदकर ने छोड़ी मुंबई टीम, जैक्सन की सौराष्ट्र में वापसी
मुंबई। 2011 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले बाएं हाथ के ओपनर अखिल हेरवदकर ने मुंबई की टीम छोड़ दी है, जबकि दिग्गज घरेलू क्रिकेटर शेल्डन जैक्सन की सौराष्ट्र की टीम में वापसी हुई है। हेरवदकर ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा प्री-सीजन कैंप के लिए घोषित संभावित सूची में उनके नाम पर विचार न किए जाने के बाद टीम से बाहर होने का फैसला लिया है। वहीं जैक्सन ने एक पेशेवर के रूप में पुडुचेरी के साथ एक साल बिताने के बाद सौराष्ट्र लौटने का फैसला किया है।
मुंबई के खिताब जीतने वाले 2015-16 सीजन में 879 रन बनाने वाले 26 वर्षीय हेरवदकर ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) से एनओसी मांगी थी और कुछ दिन पहले एमसीए ने एनओसी दे दी थी, हालांकि हेरवदकर ने यह नहीं बताया है कि वह किस स्थिति में टीम बदल रहे हैं। यह समझा जाता है कि पुडुचेरी बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज की तलाश में है। हेरवदकर आखिरी बार तीन साल पहले 2018 में मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेले थे।
इस बीच सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) के अध्यक्ष जयदेव शाह ने रविवार को पुष्टि की कि 34 वर्षीय बल्लेबाज शेल्डन जैक्सन इस साल अपने राज्य की टीम के लिए खेलेंगे, जो 2019-20 सीजन में उनकी रणजी ट्रॉफी विजेता टीम का हिस्सा थे, लेकिन क्या हेरवदकर जैक्सन की जगह लेंगे, पुडुचेरी की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
पुडुचेरी क्रिकेट संघ के एक अधिकारी ने कहा, हमें बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज की जरूरत है, लेकिन हमारे पास विकल्प हैं। हमारे पास फैसला करने का समय है।
इस बीच सलिल अंकोला (अध्यक्ष), गुलाम पारकर, सुनील मोरे, आनंद याल्विगी और प्रसाद देसाई की मौजूदगी वाली मुंबई की सीनियर चयन समिति ने रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, शार्दुल ठाकुर, पृथ्वी शॉ और सूर्यकुमार यादव जैसे खिलाडिय़ों को चुना है, जो इंग्लैंड और श्रीलंका में राष्ट्रीय कर्तव्यों पर हैं।
मुंबई की संभावित टीम : रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, शार्दुल ठाकुर, पृथ्वी शॉ, धवल कुलकर्णी, शिवम दुबे, आदित्य तारे, यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान, अर्जुन तेंदुलकर, सिद्धेश लाड, आकर्षित गोमेल, प्रग्नेश कनपिलेवार, दिव्यांश सक्सेना, चिन्मय सुतार, अरमान जाफर, सुवेद पारकर, भूपेन लालवानी, हार्दिक तमोर, आकाश पारकर, अमन खान, शुभम रंजन, सुजीत नायक, साईराज पाटिल, प्रसाद पवार, शम्स मुलानी, अथर्व अंकोलेकर, ध्रुमिल मटकर, श्रेयस गुरव, तनुश कोटियन, अंकुश जायसवाल, शशांक अटारडे, प्रशांत सोलंकी, परीक्षित वलसांगकर, तुषार देशपांडे, मोहित अवस्थी, निखिल दाते, रोयस्तान डायस, आतिफ अत्तरवाला, सिद्धार्थ राउत, कृतिक हनागवाड़ी, दीपक शेट्टी, रवि सोलंकी।
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मैं उनमें से हूं जो अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं : स्वीटी बूरा
जयपुर ,14 जुलाई । जिनके इरादे मजबूत होते हैं वे हमेशा अपना रास्ता खोज लेते हैं और यह बात भारतीय मुक्केबाज स्वीटी बूरा पर स्पष्ट रूप से लागू होती है। 2009 में अपने गृहनगर (हिसार) में कबड्डी खेलने वाली एकमात्र लड़की होने से लेकर, बॉक्सिंग को चुनने तक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक, स्वीटी ने निश्चित रूप से एक लंबा सफर तय किया है।
स्पोर्ट्स टाइगर की नई इंटरव्यू सीरीज मिशन गोल्ड पर बातचीत के दौरान उन्होंने अपने सफर के बारे में बताया। बॉक्सिंग चुनने वाली एकमात्र लड़की के रूप में बड़ा होना थोड़ा मुश्किल था। लेकिन खेल के प्रति अटूट जुनून ने स्वीटी को आगे बढ़ाया। हालाँकि, स्वीटी को एक इंजीनियर के रूप में देखना उनके पिता का सपना था, लेकिन उन्होंने वही चुना जिसके प्रति उनका जुनून था और उन्होंने इस क्षेत्र में नई ऊँचाईयां भी हासिल की।
बॉक्सर बनने से पहले स्वीटी राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी थीं। लेकिन उनके पिता ने एक बहुत ही खास कारण से उन्हें बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हसंकर वह कारण बताया जिसने उन्हें बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया और कहा, मैंने बॉक्सिंग को इसलिए चुना क्योंकि मैं स्कूल में बहुत कम बात करती थी लेकिन हर बार जब चीजें गलत होती थीं, तो मैं इसे संभाल नहीं पाती थी। मैं कई बार अपने साथियों को समझाने की कोशिश करती थी, लेकिन फिर भी वे मुझे पलट कर जवाब देते थे तो भी मैं अपने आप को शांत रखने की कोशिश करती थी। लेकिन फिर भी वे नहीं समझते थे तो मैं उनपर मुक्के बरसाती थी।
बॉक्सिंग के प्रति अपने प्यार को महसूस करने के बाद, 2009 में साआई (स््रढ्ढ) में एक ट्रायल दिया और एक प्रशिक्षित बॉक्सर के खिलाफ पहले राउंड में हार गई और तब उनके भाई ने उन्हें यह कहकर चिढ़ाया कि, दिखा दिए उसने दिन में तारे। इसके बाद फिर से उन्होंने हिम्मत जुटाई और अपने प्रतिद्वंद्वी को सिर्फ अपर कट पंच मारकर बाहर कर दिया और इस तरह, उन्होंने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुआत की।
उन्होंने साई में अपनी पहली फाइट को याद करते हुए कहा कि, यह मेरी पहली फाइट थी और कोच ने मेरे भाई और मेरे अंकल से कहा कि मैं इस खेल में काफी ऊँचाईयां हासिल कर सकती हूं। उसके बाद मैंने 15 दिनों तक स्टेट के लिए खेला जहां मैंने स्वर्ण पदक हासिल किया और 3 महीने के भीतर, मैंने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया जहां मैंने फिर से एक स्वर्ण हासिल किया। और फिर अंत में 2011 में, मैं एक इंटरनेशनल बॉक्सर बन गई और देश के लिए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया। 2012 में, मैंने यूथ कॉम्पिटिशन में भाग लिया और स्वर्ण हासिल किया और मेरे असाधारण प्रदर्शन के कारण वे मुझे सीनियर कैंप में ले गए। मैंने राष्ट्रीय स्तर एवं सीनियर स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया लेकिन मुझे कोई इंटरनेशनल टूर्नामेंट नहीं दिया गया।
लेकिन 2014 में उनके जीवन ने अलग मोड़ ले लिया, जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और फेडरेशन ने एक घोषणा की जिसने उनके करियर को बदल दिया। उन्होंने कहा, 2014 में, मैं टाइफाइड के कारण बीमार पड़ गई और मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। और उस समय उन्होंने घोषणा की कि जो कोई भी राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता बनेगा, केवल वे ही विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले पाएंगे। मेरे डॉक्टर ने मुझे आराम करने की सलाह दी लेकिन खेल के प्रति प्यार ने मुझे आगे बढ़ाया और मैं अस्पताल से भाग गई, 100 मीटर की दौड़ लगाकर ट्रेन पकड़ ली और ट्रेन में बेहोश हो गई। मेरे माता-पिता ने मुझे वापस आने के लिए कहा लेकिन मैं भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए दृढ़ थी और उन्होंने मुझे आगे बढऩे के लिए आशीर्वाद दिया।उसके बाद, 5 दिवसीय राष्ट्रीय टूर्नामेंट में, स्वीटी ने फाइट में सबको हराया और जीत हासिल की, भले ही वह रिंग से दूर होने पर मुश्किल से चल पा रही थी।
2014 विश्व चैंपियनशिप में पोडियम तक के सफर को याद करते हुए, जहां स्वीटी ने रजत पदक जीता था, उन्होंने कहा, विश्व चैंपियनशिप में, मेरे सामने वास्तव में कठिन प्रतिद्वंद्वी थे और वे मेरी वेट कैटेगिरी के लिए ट्रायल करना चाहते थे क्योंकि उन्हें यकीन था कि मैं नहीं जीत पाऊँगी। लेकिन फेडरेशन ने पहले ही घोषणा कर दी थी, इसलिए वे ट्रायल नहीं कर सके। इसलिए उन्होंने चलिफाई करने के बावजूद मुझे या किसी को भी मेरी वेट कैटेगिरी में नहीं लेने का फैसला किया। फिर आखिरी दिन उन्होंने मुझे लेने का फैसला किया। और मैं फाइनल में पहुंची और अपने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता।
अधिकांश एथलीटों की तरह, दो बार के एशियाई चैम्पियनशिप पदक विजेता के लिए महामारी का दौर कठिन रहा, हाल ही में 2021 एशियाई चैम्पियनशिप में उन्होंने दुबई में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने उस समय को याद किया और जब वे अकेले अभ्यास कर रही थीं और तैयारियों में जुटी हुई थीं, उन्होंने कहा, हमने एशियाई चैम्पियनशिप 2021 के लिए अपने घरों में अभ्यास किया, हालांकि कैंप का आयोजन किया गया था लेकिन यह केवल ओलंपिक के लिए क़्वालीफाई किये हुए खिलाडिय़ों के लिए था। शिविर में 5 लड़कियों ने भाग लिया, जबकि मेरे सहित 5 ने अपने घरों पर अभ्यास किया। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम इस टूर्नामेंट में भाग लेंगे क्योंकि महामारी के कारण आने जाने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध था। आखिरी समय में हमें अनुमति मिली और मैंने चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता।
इतनी उपलब्धियों के बावजूद, हिसार की मुक्केबाज़ का भाग्य उनके साथ नहीं रहा क्योंकि इस साल ओलंपिक चलीफिकेशन से ठीक पहले उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा था। तब उन्होंने बॉक्सिंग छोड़कर कबड्डी में लौटने पर भी विचार किया। उन्होंने कहा, मैंने कैंप छोड़ दिया और वापस आ गई क्योंकि मुझे ओलंपिक चलीफाइंग में भाग लेने का मौका नहीं दिया गया। मैं यह सोचकर घर वापस आ गई थी कि अगर मुझे ओलंपिक चलीफिकेशन में भाग लेने का मौका ही नहीं मिला तो खेल को आगे जारी रखने का क्या फायदा मैं विश्व और एशियाई लेवल पर खेल चुकी हूं और कई पदक जीते हैं। केवल एक चीज जो मेरे पास नहीं है वह है ओलंपिक पदक। अगर ऐसा ही था तो मैं कबड्डी खेलने के लिए भी तैयार थी।
लेकिन इसके बाद भी, वह 2024 के पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए काफी दृढ़ निश्चयी हैं और उन्होंने कहा, मैं उनमें से हूं जो अपने सपनों को हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं । मेरे पास 2024 के ओलंपिक की तैयारी के लिए अभी भी तीन साल और हैं और मैं निश्चित रूप से अगले ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद करती हूं।
उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि उन्हें अपने साथी खिलाडिय़ों पर बहुत गर्व है जो इस महीने के अंत में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं भी दीं और कहा, इस महीने से टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे मुक्केबाजों को शुभकामनाएं।
अंत में उन्होंने सुझाव दिया कि युवा महिला मुक्केबाजों को अपने सपनों की दिशा में लगातार काम करना चाहिए और किसी को भी उनके इरादों को तोडऩे का प्रयास नहीं करना चाहिए।
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम पर धीमे ओवर रेट के लिए जुर्माना
दुबई , । भारतीय महिला क्रिकेट टीम पर होव में इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 मुकाबले में धीमे ओवर रेट के लिए 20 फीसदी मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने इसकी पुष्टि की है।
निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखने के बाद यह पाया गया कि इंग्लैंड की पारी के दौरान भारतीय टीम ने निर्धारित समय में एक ओवर कम फेंका। परिणामस्वरूप मैच रेफरी फिल व्हिटिसेज ने जुर्माना लगाया है। आईसीसी ने एक बयान में कहा, खिलाडिय़ों और उनके व्यक्तिगत सपोर्ट स्टाफ के लिए आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22, जो धीमे ओवर-रेट उल्लंघन से संबंधित है के अनुसार खिलाडिय़ों पर उनकी मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है, जब उनकी टीम आवंटित समय में पूरे ओवर डालने में विफल रहती है।
इस मामले में चूंकि भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने उल्लंघन की बात स्वीकार की है, इसलिए मामले में औपचारिक सुनवाई नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि भारतीय महिला टीम ने दूसरे रोमांचक टी-20 मुकाबले को आठ रन से जीत लिया था। वह अब बुधवार को चेम्सफोर्ड में आखिरी और निर्णायक टी-20 मैच खेलेगी।
