चंडीगढ़: 22 करोड़ से बना रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन हो रहा जर्जर, अब फिर 3 करोड़ खर्च हॉल को बना रहे हाईटेक
चंडीगढ़ । सेक्टर-38सी स्थित रानी लक्ष्मीबाई महिला भवन को बनाने पर नगर निगम ने 22 करोड़ रुपये खर्च कर अपने लिए सफेद हाथी तैयार किया था। छह साल तक कोई गतिविधि न होने पर अब जर्जर होते महिला भवन के एक हॉल को नगर निगम लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक बना रहा है। टैगोर थिएटर की तर्ज पर बनने वाले सभी सुविधाओं से युक्त इस हॉल का जल्द उद्घाटन होगा। इसमें लगभग 250 से 300 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। केंद्र की ओर से महिलाओं को एक नई दिशा देने और उनकी प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने भवन की आधारशिला रखी थी, लेकिन सरकारी दफ्तरों में लगभग 6 साल तक फाइल घूमती रही।
छह साल पहले बनकर हुआ था तैयार
वर्ष 2015 में 1.3 एकड़ में भवन बनकर तैयार हो गया। आधुनिक सुविधाओं से युक्त चंडीगढ़ का यह पहला भवन था, लेकिन उसमें महिलाओं के लिए कुछ भी योजना नहीं बन सकी। हालात यह हो गए कि भवन की छत से पानी टपकने लगा। उसमें रखे उपकरण भी धूल फांक रहे हैं। इस पर सदन में खूब हंगामा भी हुआ और योजना भी बनी, लेकिन हकीकत में किसी योजना का लाभ महिलाओं को नहीं मिला। अब एक हॉल को फिर से मरम्मत करवाकर आयोजन के योग्य बनवाया जा रहा है, जिसका जल्द उद्घाटन होगा।
महिलाओं को ये सुविधाएं देने की थी योजना
भवन में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए एक पुलिस परामर्श केंद्र, एक स्त्री रोग परामर्श केंद्र, एक महिला पुस्तकालय, एक प्रदर्शनी केंद्र, एक जिम, एक छात्रावास, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की योजना और प्रदर्शनी के लिए एक हॉल बना था। लेकिन बेहतर योजना न बनने से यह बिल्डिंग महज एक राजनीति का मुद्दा बनकर रह गई। वर्ष 2017 में जिम को शुरू भी कराया गया। इसमें काफी संख्या में महिलाएं भी आईं। लेकिन निगम में जिम ट्रेन की नीति न होने से यह बंद हो गई।
कोविड के बाद अधिकारियों के खुल गए दफ्तर
कोविड के बाद महिला भवन में नगर निगम के एसडीओ ने दफ्तर बना लिए हैं। जबकि इस भवन में सिर्फ महिलाओं से जुड़े कार्य और उनके लिए ही दफ्तर बनने थे। इसके लिए कई बार सदन में बहस भी हो चुकी है।
विपक्ष का आरोप, भाजपा पार्षद और अधिकारियों में तालमेल के अभाव में भवन खंडहर बना
नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने बताया कि कांग्रेस के कार्यकाल में भवन की योजना बनी थी। इसमें परीक्षा देने के लिए आने वाली बाहरी महिलाओं के लिए रुकने की व्यवस्था, एक छात्रावास खोलने की योजना, कंप्यूटर, सिलाई मशीन, ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक संगीत केंद्र बनाने की योजना थी। भाजपा के पार्षद और अधिकारियों के तालमेल की कमी से भवन खंडहर में बदल गया।
