March 9, 2026

पितरों को याद कर पुस्तक का विमोचन सुखद क्षण

गरुड , बागेश्वर ।   हिन्दी दिवस पर हिन्दी के तीन लेखकों की पुस्तकों का विमोचन किया गया। साहित्यकार मोहन जोशी ने कहा कि पितृ पक्ष में पितरों को याद कर पुस्तक विमोचन करना एक सुखद पल है। हिन्दी दिवस मनाने के बजाए हमें हिन्दी भाषा अपनानी होगी। यह हमारी भाषा ही नहीं बल्कि हमारी पहचान भी है। उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति गरुड़ के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में मोहन जोशी की मोहन बाल कहानियां, आशा बुटोला की प्रतीक्षा, काव्य संग्रह तथा सुरेद्र वर्मा की जड़ों की छांव, काव्य संग्रह का विमोचन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने कहा कि हिन्दी भाषा देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। सबसे अधिक साहित्य भी हिन्दी में लिखा गया है। सुरेंद वर्मा ने कहा कि जड़ों का छांव समर्पित है संघर्ष भरे जीवन को उन बुजुर्गों को जिनका जीवन आश्रमों में बीत जाता है। यह मेरी दूसरी किताब है। सभी का स्नेह मिल रहा है। इसमें 54 कविताएं संग्रहित हैं। आजादी के सात दशक से भी ज्यादा समय हो गए हैं हम अभी भी हिंदी दिवस मनाने पर तुले हैं। दिवस मनाने के साथ भाषा को अपना बनाना होगा। इस मौके पर रतन सिंह किरमोलिया , जावेद सिद्दीकी, हरीश जोशी, आशा जोशी, प्रेमा भट्ट, अनिल पांडे, चंद्र शेखर, डॉ हेम चंद्र दूबे, डॉ गोपाल कृष्ण जोशी, त्रिलोक बुटोला, डॉ गिरीश अधिकारी, मनोज खोलिया आदि मौजूद रहे।